एविएशन सेक्टर की उड़ान से होटलों को फायदा
भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2024-25 के वित्तीय वर्ष में 412 मिलियन यात्रियों के साथ, यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। बड़े एयरपोर्ट के विस्तार और नई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के साथ-साथ उड़ान (UDAN) जैसी योजनाओं से छोटे शहरों को जोड़ने के कारण यह ग्रोथ संभव हो पाई है। नतीजतन, एयरपोर्ट होटल सिर्फ यात्रियों के ठहरने की जगह न रहकर, महत्वपूर्ण कमर्शियल हब बनते जा रहे हैं। दिल्ली NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बिजी एयरपोर्ट के पास बने होटल, भीड़भाड़ वाले शहरों में समय बचाने की कोशिश करने वाले बिजनेस ट्रैवलर्स के लिए बेहद जरूरी हो गए हैं। सिंगापुर के चांगी और दुबई इंटरनेशनल जैसे ग्लोबल एयरपोर्ट्स की तरह, भारत भी एयरपोर्ट और होटलों को मिलाकर जीवंत हब बनाने का तरीका अपना रहा है। उम्मीद है कि यह सेक्टर सालाना 8-10% की दर से बढ़ेगा।
MICE और बिजनेस ट्रैवल से होटल हो रहे गुलजार
एयरपोर्ट होटल अब दोहरे उद्देश्य पूरे कर रहे हैं। ये ट्रांजिट यात्रियों को सुविधा देने के साथ-साथ MICE (मीटिंग्स, इंसेटिव्स, कॉन्फ्रेंसेज और एग्जीबिशन) इवेंट्स, कॉर्पोरेट मीटिंग्स और को-वर्किंग के लिए भी अहम ठिकाने बन गए हैं। MICE सेक्टर, जिसके 2030 तक 103.7 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, इस बदलाव का एक बड़ा कारण है। उदाहरण के तौर पर, Chalet Hotels Limited एयरपोर्ट होटल के साथ ऑफिस स्पेस को जोड़कर मजबूत रेवेन्यू और प्रॉफिट मार्जिन हासिल कर रही है। Radisson Hotel Group की 2030 तक भारत में 500 होटल खोलने की योजना है, जिसका फोकस एयरपोर्ट लोकेशन पर है, क्योंकि वे बड़े शहरों के अलावा छोटे कस्बों में भी ग्रोथ देख रहे हैं। IHCL (Taj), ITC Hotels और Lemon Tree Hotels जैसे बड़े ग्रुप्स भी एयरपोर्ट के करीब विस्तार कर रहे हैं। भारत का हॉस्पिटैलिटी मार्केट घरेलू ट्रैवल और बेहतर कनेक्टिविटी से प्रेरित होकर 2028 तक 60 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
संभावित जोखिमों पर भी नजर
हालांकि ग्रोथ अच्छी है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। एयरपोर्ट के पास बहुत ज्यादा नए होटल खुलने से सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे ऑक्यूपेंसी (Occupancy) और रूम रेट (ADR - Average Daily Rate) पर असर पड़ सकता है। जो होटल सिर्फ एयर ट्रैवल पर निर्भर हैं, वे एविएशन सेक्टर में किसी भी गिरावट, जैसे फ्यूल की बढ़ती कीमतें या फ्लाइट में रुकावट, से प्रभावित हो सकते हैं। बड़े प्रोजेक्ट बनाने में जमीन हासिल करने से लेकर कंस्ट्रक्शन पूरा करने तक के जोखिम भी शामिल हैं। डोमेस्टिक और इंटरनेशनल चेन जैसे Marriott और Hilton के विस्तार के साथ, खासकर छोटे शहरों में, प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। कुछ शहरों के बाजारों में अस्थायी दिक्कतें हो सकती हैं, वहीं बढ़ती लागत और कुछ इलाकों में सीमित नए सप्लाई से प्राइसिंग मुश्किल हो सकती है।
भविष्य का दृष्टिकोण सकारात्मक
एनालिस्ट्स (Analysts) एयरपोर्ट होटलों को लेकर काफी उत्साहित हैं। Motilal Oswal को उम्मीद है कि MICE इवेंट्स और नए एयरपोर्ट्स, जैसे आने वाले Navi Mumbai International Airport, से एवरेज रूम रेट (ARR - Average Room Rate) और रेवेन्यू पर अवेलेबल रूम (RevPAR - Revenue Per Available Room) में तेजी से ग्रोथ होगी। एयरपोर्ट होटल यात्रियों और बिजनेस दोनों यूजर्स से फायदा उठाते हैं, जिससे उन्हें सिटी होटलों पर बढ़त मिलती है। निवेशक इसमें ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं, इसे एक स्थिर और भरोसेमंद अवसर के तौर पर देख रहे हैं। एयरपोर्ट का लगातार विस्तार और पर्यटन को सरकारी समर्थन इस सेक्टर को आगे बढ़ाता रहेगा, जिससे एयरपोर्ट होटल भारत के हॉस्पिटैलिटी भविष्य का अहम हिस्सा बनेंगे।
