Indian Real Estate: अब 'लाइफस्टाइल एसेट' बन रहे हैं दूसरे घर, जानिए क्या है बड़ा बदलाव?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Real Estate: अब 'लाइफस्टाइल एसेट' बन रहे हैं दूसरे घर, जानिए क्या है बड़ा बदलाव?

भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब शहरी पेशेवर दूसरे घर को सिर्फ 'इन्वेस्टमेंट' (Investment) के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने और सुकून के पल बिताने के लिए खरीद रहे हैं। इस बदले ट्रेंड से कोस्टल (Coastal) और पहाड़ी इलाकों में डिमांड बढ़ी है।

दूसरे घर खरीदने की बदली सोच

अब भारत में दूसरे घर की परिभाषा बदल रही है। पहले लोग दूसरा घर किराए से कमाई या प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ने के इंतजार में खरीदते थे। लेकिन अब, खासकर शहरी प्रोफेशनल्स (Professionals), इसे एक ऐसी जगह के तौर पर देख रहे हैं जहाँ वे अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, सुकून से वक्त बिता सकें और एक अलग तरह की लाइफस्टाइल को अपना सकें।

कहां बढ़ रही है डिमांड?

इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (Ultra-High-Net-Worth Individuals) में से करीब 32% लोग दूसरा घर खरीदने की सोच रहे हैं या खरीद चुके हैं। इसकी डिमांड मुख्य रूप से अलीबाग (Alibaug), लोनावला (Lonavala), कर्जत (Karjat), नॉर्थ गोवा (North Goa) और कई पहाड़ी इलाकों में देखी जा रही है। खरीदार अब प्रॉपर्टी की कीमत से ज्यादा इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि वह बड़े शहरों के कितने करीब है, वहां सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) कैसा है और हेल्थकेयर जैसी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं।

डेवलपर्स का नया प्लान

इस ट्रेंड को देखते हुए डेवलपर्स (Developers) भी अपने प्रोजेक्ट्स के डिजाइन बदल रहे हैं। अब स्टैंडर्ड लेआउट (Standard Layout) की जगह ऐसे प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया जा रहा है जहाँ कम्युनिटी लिविंग (Community Living), वेलनेस (Wellness) और नेचर-सेंट्रिक (Nature-centric) सुविधाएं हों। इन घरों को 'लाइफस्टाइल लैबोरेटरी' (Lifestyle Laboratory) की तरह पेश किया जा रहा है, जहाँ परिवार लंबे समय तक रुक सकें।

क्या हैं खतरे?

हालांकि, दूसरा घर खरीदने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। रियल एस्टेट, स्टॉक या बॉन्ड जैसे फाइनेंशियल एसेट्स (Financial Assets) की तरह लिक्विड (Liquid) नहीं होता, यानी जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत कैश में बदलना मुश्किल है। साथ ही, दूसरा घर रखने का मतलब है लगातार मेंटेनेंस (Maintenance), सिक्योरिटी (Security), प्रॉपर्टी टैक्स और यूटिलिटी (Utility) का खर्च, चाहे आप वहां रहें या न रहें। ये छुपे हुए खर्चे लंबे समय में आपके रिटर्न (Return) पर असर डाल सकते हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता

खासकर दूरदराज के पहाड़ी या कोस्टल इलाकों में दूसरे घर की वैल्यू काफी हद तक वहां के रोड नेटवर्क और पानी-बिजली जैसी बेसिक सुविधाओं पर निर्भर करती है। अगर ये सुविधाएं ठीक नहीं हैं, तो प्रॉपर्टी को मेंटेन करना और बेचना दोनों मुश्किल हो सकता है।

आगे क्या?

यह देखना अहम होगा कि डेवलपर्स इन ऑपरेशन्स (Operations) को कैसे मैनेज करते हैं। जो प्रोजेक्ट्स अच्छी प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सर्विस (Property Management Service) देंगे, वे ज्यादा सफल रहेंगे। इस सेगमेंट का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि डेवलपर्स सुविधाओं की क्वालिटी कैसे बनाए रखते हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) इस बढ़ती मांग के साथ तालमेल बिठा पाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.