Indian Real Estate: विदेशी नहीं, अब भारतीय निवेशकों का दबदबा! रियल एस्टेट में आया **$2.7 बिलियन** का निवेश

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Real Estate: विदेशी नहीं, अब भारतीय निवेशकों का दबदबा! रियल एस्टेट में आया **$2.7 बिलियन** का निवेश

भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी (PE) इनफ्लो में **23%** का उछाल आया है, जो कुल **$2.7 बिलियन** तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि इस बार निवेश का आधा हिस्सा घरेलू निवेशकों से आया है, जो एक बड़ा बदलाव है।

भारतीय रियल एस्टेट मार्केट के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही काफी शानदार रही है। पिछले साल के मुकाबले निवेश में 23% की बढ़त देखी गई है। अब तक के ट्रेंड्स को देखें तो मार्केट काफी मैच्योर हो रहा है, क्योंकि अब इसमें ग्लोबल फंड्स के साथ-साथ घरेलू पैसा भी तेजी से लग रहा है।

घरेलू निवेशकों का बढ़ता जलवा

इस साल निवेश के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। लोकल इंस्टीट्यूशंस, फैमिली ऑफिस और ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स अब मुख्य भूमिका में हैं। पहली छमाही में भारतीय निवेशकों ने 24 डील्स के जरिए $1.3 बिलियन का निवेश किया है। यह ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता से बचने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है।

डेटा सेंटर्स पर दांव

निवेशकों की पसंद अब बदल रही है। ऑफिस स्पेस अभी भी 35% हिस्सेदारी के साथ टॉप पर है, लेकिन डेटा सेंटर्स का जलवा जबरदस्त है। पिछले साल जहां डेटा सेंटर्स में सिर्फ 4% निवेश था, वहीं अब यह बढ़कर 29% हो गया है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरत के कारण फंड्स अब सर्वर और कंप्यूटिंग पावर वाली संपत्तियों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।

डेट से हटकर इक्विटी पर फोकस

अब निवेश का जरिया भी बदल रहा है। कुल पीई इनफ्लो का 83% अब इक्विटी के रूप में आ रहा है। इसका मतलब है कि निवेशक अब सिर्फ लोन देकर ब्याज नहीं कमाना चाहते, बल्कि वे प्रोजेक्ट्स में सीधी हिस्सेदारी (Ownership Stake) ले रहे हैं। निवेशक अब एक ही प्रॉपर्टी के बजाय उन बड़े प्लेटफॉर्म्स को चुन रहे हैं जो पूरे देश में फैले हुए हैं और बेहतर मैनेजमेंट क्षमता रखते हैं।

रिस्क और चुनौतियां

सब कुछ अच्छा दिखने के बावजूद कुछ रिस्क भी हैं। डेटा सेंटर्स के लिए बिजली की निर्बाध सप्लाई और कड़े रेगुलेटरी नियमों का पालन करना एक बड़ी चुनौती है। वहीं, रेजिडेंशियल सेक्टर अभी भी 'स्ट्रक्चर्ड डेट' पर निर्भर है, जिसमें प्रोजेक्ट में देरी या पेमेंट डिफॉल्ट का रिस्क बना रहता है। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि डेवलपर्स बिना लागत बढ़ाए इन बड़े प्रोजेक्ट्स को कैसे पूरा करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.