भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा इस तिमाही में और बढ़ा है। 2026 की दूसरी तिमाही में, रियल एस्टेट में इंस्टीट्यूशनल निवेश 70% बढ़कर $2.9 अरब (लगभग ₹24,000 करोड़) पर पहुंच गया। हालांकि, ऑफिस सेगमेंट में निवेश बढ़ा है, लेकिन रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश में बड़ी गिरावट देखी गई।
क्या हुआ?
2026 की दूसरी तिमाही में भारतीय रियल एस्टेट बाजार में इंस्टीट्यूशनल कैपिटल का फ्लो काफी बढ़ा है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 70% की बढ़ोतरी के साथ $2.9 अरब (लगभग ₹24,000 करोड़) तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फंड्स के मिले-जुले निवेश से हुई है, जिसमें घरेलू निवेशकों की भूमिका पहले के मुकाबले ज्यादा अहम रही। इस तीन महीने की अवधि में चेन्नई और बेंगलुरु सबसे सक्रिय बाजार बनकर उभरे हैं, जिन्होंने कुल निवेश का लगभग 27% हिस्सा आकर्षित किया है।
ऑफिस और मिक्स्ड-यूज़ एसेट्स की ओर झुकाव
इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए ऑफिस सेगमेंट पसंदीदा बना हुआ है, जिसने 2026 की पहली छमाही में लगभग $1.9 अरब का निवेश हासिल किया है। यह आधे साल के कुल निवेश का 40% से अधिक है। हाल के बड़े सौदों में कोटक ऑल्टरनेट एसेट मैनेजर्स द्वारा प्रबंधित एक मिक्स्ड-यूज़ पोर्टफोलियो में अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी का $675 मिलियन का निवेश शामिल है। इसके अलावा, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड द्वारा CtrlS में $440 मिलियन के निवेश ने डेटा सेंटर और अल्टरनेटिव एसेट्स स्पेस में बड़ी रुचि दिखाई है।
रेजिडेंशियल सेगमेंट पर दबाव
जहां कमर्शियल और ऑफिस स्पेस में मजबूत रुचि देखी जा रही है, वहीं रेजिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई है। 2026 की पहली छमाही में रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स में निवेश 43% घटकर $0.5 अरब पर आ गया। यह गिरावट नए बड़े रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की मांग में बदलाव का संकेत देती है या फिर यह इंस्टीट्यूशनल रणनीति में बदलाव का हिस्सा हो सकता है, जो अधिक स्थिर, लॉन्ग-टर्म रेंटल या ऑपरेशनल रिटर्न वाले एसेट्स की ओर बढ़ रही है।
घरेलू विश्वास और टियर-II शहरों में ग्रोथ
सबसे खास बातों में से एक है घरेलू निवेश का दोगुना होना, जो $1.33 अरब तक पहुंच गया है और अब कुल इंस्टीट्यूशनल इनफ्लो का 46% है। यह बताता है कि स्थानीय वित्तीय संस्थान और ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा, इंस्टीट्यूशनल रुचि टॉप मेट्रो शहरों से आगे बढ़कर अन्य क्षेत्रों में भी फैल रही है। कूर्ग, होसुर, कोयंबटूर, कोच्चि और उज्जैन जैसे क्षेत्रों में नई पूंजी का निवेश देखा जा रहा है, खासकर हॉस्पिटैलिटी, वेयरहाउसिंग और इंडस्ट्रियल सेगमेंट में।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि यह इनफ्लो ऑफिस सेगमेंट के लिए प्रोजेक्ट कंप्लीशन टाइमलाइन और ऑक्यूपेंसी रेट्स में कैसे तब्दील होता है। चूंकि ऑफिस स्पेस वर्तमान में पूंजी का मुख्य चालक है, इसलिए बाजार का स्वास्थ्य कमर्शियल स्पेस की निरंतर मांग पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, रेजिडेंशियल सेक्टर में इंस्टीट्यूशनल रुचि में गिरावट के बावजूद, किसी भी नीतिगत बदलाव या घर खरीदने की मांग में बदलाव से आने वाली तिमाहियों में यह ट्रेंड बदल सकता है। लिस्टेड रियल एस्टेट डेवलपर्स के प्रदर्शन और ऑफिस बनाम रेजिडेंशियल पोर्टफोलियो में उनके एक्सपोजर पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
