मार्केट का हाल: वॉल्यूम में गिरावट, कीमतें स्थिर
फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में भारत के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में सेल्स वॉल्यूम 0% से 3% तक कम हुआ। बेचे गए एरिया का अनुमान 625 से 645 मिलियन स्क्वायर फीट के बीच है। नए प्रोजेक्ट लॉन्च भी 1% से 4% तक सिकुड़ गए, जिनका अनुमान 645 से 665 मिलियन स्क्वायर फीट लगाया गया है। इसका सबसे बड़ा कारण प्रोजेक्ट अप्रूवल मिलने में लगातार हो रही देरी है। पिछले तिमाही में मिडिल ईस्ट संघर्षों से जुड़ी भू-राजनीतिक (Geopolitical) टेंशन ने खरीदारों के सेंटिमेंट को भी प्रभावित किया। वॉल्यूम में आई इस गिरावट के बावजूद, सेक्टर ने कीमतों के मोर्चे पर मजबूती दिखाई। फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) में 15% की बढ़ोतरी के बाद, FY26 में कीमतों में 6% से 8% की और वृद्धि का अनुमान है। डेवलपर्स कीमतों में बढ़ोतरी के लिए प्रीमियम और लग्जरी घरों की बिक्री का फायदा उठा रहे हैं।
डेवलपर्स आशावादी, लेकिन एक्सपर्ट्स की राय अलग
इंडस्ट्री के फोरकास्ट और डेवलपर्स के अपने आउटलुक के बीच एक बड़ा अंतर देखा जा रहा है। ICRA और Crisil जैसी रेटिंग एजेंसियां FY27 के लिए सेल्स वैल्यू ग्रोथ के 4% से 6% तक धीमा होने का अनुमान लगा रही हैं, जिसमें ASP में 3% से 5% की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, कुछ बड़े इंडस्ट्री प्लेयर्स बहुत आशावादी हैं। उदाहरण के लिए, Mahindra Lifespace Developers ने FY27 के लिए ₹4,500 करोड़ से ₹5,000 करोड़ तक के रेवेन्यू का अनुमान दिया है, और उनका लक्ष्य 2030 तक ₹10,000 करोड़ तक पहुंचना है। यह आशावाद मजबूत फाइनेंशियल हेल्थ से समर्थित है। सेक्टर का ऑपरेशन हेल्दी है, जहां कलेक्शन कंस्ट्रक्शन की प्रगति के साथ मिलकर चल रहा है। इससे डेवलपर्स का बाहरी कर्ज पर निर्भरता कम हुई है, और ऑपरेशन्स से कैश फ्लो FY27 में 15% से 17% तक बढ़ने की उम्मीद है। यह लगातार कैश जनरेशन बिक्री वॉल्यूम में गिरावट से सुरक्षा प्रदान करता है और चल रहे डेवलपमेंट को सपोर्ट करता है।
प्रमुख कंपनियां और उनकी वैल्यूएशन
भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में कई तरह के डेवलपर्स मौजूद हैं। DLF Ltd. जैसे प्रमुख प्लेयर्स, जिनकी मार्केट कैप लगभग ₹1.25 लाख करोड़ है और P/E रेशियो करीब 28.93 है, लगातार रेवेन्यू ग्रोथ के साथ बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। Godrej Properties, जिनकी वैल्यू ₹44,000 करोड़ से अधिक है और P/E करीब 27.73 है, और Prestige Estates Projects, जिनकी वैल्यू ₹48,000 करोड़ से अधिक और P/E 50.00 के करीब है, भी प्रमुख हैं। Lodha (Macrotech Developers) की मार्केट कैप ₹67,000 करोड़ से ज्यादा है और P/E लगभग 20.24 है। Mahindra Lifespace Developers, जिनकी मार्केट कैप लगभग ₹6,628 करोड़ है, 94.02 के उच्च P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहा है, जो प्रीमियम वैल्यूएशन या हाई ग्रोथ की उम्मीदों का संकेत देता है। इस सेक्टर में Blackstone जैसी फर्मों से बड़ा संस्थागत निवेश (Institutional Investment) भी देखा जा रहा है।
जोखिम: इन्वेंटरी और बढ़ती लागत
सकारात्मक अनुमानों के बावजूद, कुछ जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है। 'इयर्स टू सेल' (Years to Sell) का मीट्रिक, जो इन्वेंटरी को अवशोषित करने में लगने वाले समय को दर्शाता है, मार्च 2026 तक बढ़कर 1.4 साल और संभवतः मार्च 2027 तक 1.4 से 1.6 साल तक पहुंचने का अनुमान है। यह क्रमिक वृद्धि बताती है कि मार्केट को मौजूदा स्टॉक को क्लियर करने में कठिनाई हो सकती है, खासकर यदि FY27 में नए लॉन्च बिक्री से आगे निकल जाते हैं। इसके अलावा, निर्माण लागत में वृद्धि, जो ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतों को प्रभावित करने वाले भू-राजनीतिक तनावों से और बिगड़ गई है, एक खतरा पैदा करती है। इन बढ़ती लागतों के कारण डेवलपर्स को कीमतों में बढ़ोतरी कर ग्राहकों पर बोझ डालना पड़ सकता है, जिससे मिड-मार्केट सेगमेंट में मांग दब सकती है। ASP ग्रोथ के लिए प्रीमियम और लग्जरी बिक्री पर निर्भरता मार्केट को हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) के सेंटिमेंट में बदलाव के प्रति भी संवेदनशील बनाती है, जिनमें से कई FY27 तक लग्जरी मार्केट में नरमी की उम्मीद कर रहे हैं।
FY27 का आउटलुक: सतर्क आशावाद
FY27 को देखते हुए, अनुमान मिले-जुले हैं लेकिन सतर्क आशावाद की ओर झुके हुए हैं। ICRA मध्यम एरिया ग्रोथ 0% से 3% का अनुमान लगा रहा है, जो मिड और लग्जरी कैटेगरी की डिमांड और नए लॉन्च में 4% से 7% की अपेक्षित रिकवरी से समर्थित है। Crisil सेल्स वैल्यू ग्रोथ के 4% से 6% तक मध्यम होने की उम्मीद करता है, जिसमें ASP 3% से 5% तक बढ़ेंगे। मार्केट में मापा-गहरा विकास देखने की उम्मीद है, जिसमें स्पेकुलेशन के बजाय क्वालिटी और एग्जीक्यूशन पर ध्यान दिया जाएगा। डिमांड तेजी से वैल्यू-फॉर-मनी और लोकल मार्केट कंडीशंस से प्रेरित हो रही है। लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में मजबूती बनी हुई है, जो प्रीमियम-नेस (premiumization) की ओर ट्रेंड और संपन्न खरीदारों की मजबूत मांग से प्रेरित है। यूनियन बजट का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस भी लंबे समय में रियल एस्टेट की मांग को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने की उम्मीद है।