Q1 FY27 में लिस्टेड भारतीय रियल एस्टेट कंपनियों की कुल प्री-सेल्स **26%** गिरकर **₹366 बिलियन** पर आ गई है। मांग की कमी नहीं, बल्कि रेगुलेटरी देरी के कारण नए प्रोजेक्ट्स कम लॉन्च हुए हैं।
भारत की लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनियों के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही कुछ खास नहीं रही। एग्रीगेट प्री-सेल्स सालाना आधार पर 26% गिरकर ₹366 बिलियन पर आ गई है। अच्छी बात यह है कि यह गिरावट घर खरीदारों की घटती मांग की वजह से नहीं, बल्कि सप्लाई-साइड बॉटलनेक (Supply-side bottleneck) के कारण है। डेवलपर्स को नए प्रोजेक्ट्स के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल्स में देरी का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते नई लॉन्चिंग की रफ्तार सुस्त रही है।
कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन
सेक्टर में हर कंपनी की स्थिति एक जैसी नहीं रही। बड़े दिग्गजों जैसे DLF और Prestige Estates के आंकड़ों ने कुल प्री-सेल्स पर असर डाला। DLF ने नए प्रोजेक्ट्स की कमी के चलते बड़ी गिरावट दर्ज की, वहीं Prestige Estates की सेल्स में लगभग 46% की कमी आई, जिसका एक मुख्य कारण पिछले साल का हाई बेस इफेक्ट (High base effect) भी रहा। इसके उलट, Godrej Properties ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 22% की बढ़ोतरी के साथ ₹8,651 करोड़ की प्री-सेल्स हासिल की। इससे साफ है कि जिन कंपनियों के पास लॉन्चिंग पाइपलाइन तैयार थी, उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी बाजी मारी है।
क्या बिजनेस अभी भी मजबूत है?
भले ही नई बुकिंग्स धीमी हुई हों, लेकिन कंपनियों की फाइनेंशियल हेल्थ स्थिर बनी हुई है। जून तिमाही में कलेक्शन एफिशिएंसी (Collection efficiency) 75% रही, जो यह बताती है कि ग्राहकों से आने वाले पेमेंट और कंस्ट्रक्शन का काम सुचारू रूप से चल रहा है।
आगे का रास्ता और चुनौतियां
सेक्टर के लिए सबसे बड़ा रिस्क रेगुलेटरी क्लीयरेंस में अनिश्चितता है। रियल एस्टेट कंपनियों की पूरी सेल्स कैलेंडर उनके अप्रूवल्स पर टिकी होती है। अब निवेशकों की नजर इस पर होगी कि ये कंपनियां साल की दूसरी छमाही में अपनी पाइपलाइन को कितनी तेजी से क्लियर करा पाती हैं। मौजूदा माहौल को देखते हुए ऐसा लगता है कि ग्रोथ खत्म नहीं हुई है, बल्कि नए इन्वेंट्री के बाजार में आते ही यह फिर से रफ्तार पकड़ सकती है।
