भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश (Institutional Investment) बुरी तरह प्रभावित हुआ है। साल 2026 की तीसरी तिमाही में निवेश **76%** घटकर केवल **$705 मिलियन** रह गया है, क्योंकि अब निवेशक जोखिम लेने के बजाय सुरक्षित और इनकम देने वाली संपत्तियों पर दांव लगा रहे हैं।
भारतीय रियल एस्टेट बाजार में निवेश का रुख काफी सुस्त हो गया है। पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा $2.9 बिलियन था, जो अब घटकर केवल $705 मिलियन रह गया है। यह डेटा साफ बताता है कि निवेशक अब सट्टेबाजी या जोखिम भरे प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाकर उन एसेट्स पर फोकस कर रहे हैं जहां से उन्हें फिक्स्ड और सुरक्षित रिटर्न मिल सके।
प्राइवेट इक्विटी का दबदबा, लेकिन सावधानी के साथ
कुल डील वैल्यू में 79% हिस्सा अकेले प्राइवेट इक्विटी फंड्स का रहा। हालांकि, बाजार में पैसा कम जगह केंद्रित हो गया है। कुल निवेश का 90% से ज्यादा हिस्सा केवल चार बड़ी डील्स में गया है। इसमें Brookfield India Real Estate Trust का मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में $179 मिलियन का निवेश और Nexus Select Trust का गुवाहाटी में $168 मिलियन का रिटेल और हॉस्पिटैलिटी एसेट निवेश शामिल है।
कमर्शियल और रेजिडेंशियल पर निवेशकों का भरोसा
इंस्टीट्यूशनल प्लेयर्स अभी भी कमर्शियल एसेट्स को पहली पसंद मान रहे हैं, जिसमें $371 मिलियन का निवेश हुआ। वहीं, रेजिडेंशियल प्लेटफॉर्म्स में $183 मिलियन लगाए गए हैं। दूसरी ओर, पब्लिक मार्केट की रौनक गायब है। जहां साल 2025 में IPO और QIP के जरिए $1 बिलियन से अधिक जुटाए गए थे, वहीं इस तिमाही में केवल $59 मिलियन के दो IPO ही देखने को मिले।
M&A मार्केट की सुस्ती
मर्जर और एक्विजिशन (M&A) का बाजार भी धीमा है, जहां कुल $92 मिलियन का ही निवेश हुआ। इस बीच Aurum PropTech द्वारा Housing.com की पैरेंट कंपनी Locon Solutions का अधिग्रहण चर्चा में रहा। बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक मार्केट की अस्थिरता कम नहीं होती, तब तक निवेशक 'सिलेक्टिव' अप्रोच ही अपनाएंगे और केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाएंगे जहां काम पूरा होने की गारंटी (Execution Certainty) दिखती है।
