पिछले दो सालों में Indian REITs ने Nifty 50 से बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन बढ़ती सरकारी बॉन्ड यील्ड अब इनके वैल्यूएशन पर भारी पड़ रही है। निवेशकों के लिए इन दोनों के बीच का अंतर समझना जरूरी है।
REITs की मजबूती के पीछे की वजह
REITs (Real Estate Investment Trusts) अब उन निवेशकों की पहली पसंद बन रहे हैं जो इक्विटी जैसे रिटर्न और रेंटल इनकम की स्थिरता चाहते हैं। पिछले 2 सालों में, इन ट्रस्ट्स ने कमर्शियल प्रॉपर्टीज और मॉल्स के दम पर Nifty 50 बेंचमार्क को पीछे छोड़ दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण है ऑफिस स्पेस की बढ़ती डिमांड और रेंटल इनकम में लगातार इजाफा।
ऑक्यूपेंसी में उछाल और कमाई का गणित
देश के प्रमुख 6 REITs—Embassy Office Parks, Mindspace Business Parks, Brookfield India Real Estate Trust, Nexus Select Trust, Knowledge Realty Trust और Bagmane Prime Office REIT का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। साल 2024 में जहां ऑक्यूपेंसी 84% थी, वहीं वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत तक यह बढ़कर 92% के करीब पहुंच गई है। इन ट्रस्ट्स ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में अपने यूनिट होल्डर्स को ₹8,900 करोड़ से अधिक का डिस्ट्रीब्यूशन किया है।
SEBI के नियम के मुताबिक, REITs को अपने नेट कैश फ्लो का 90% हिस्सा निवेशकों को बांटना ही पड़ता है। साथ ही, Nifty REITs & InvITs इंडेक्स की वोलैटिलिटी 8.9% रही है, जो Nifty 50 के 13.8% के मुकाबले काफी कम है।
ब्याज दरों का दबाव
चुनौती यह है कि जैसे-जैसे भारतीय सरकारी बॉन्ड की 10-वर्षीय यील्ड 7.30% से 7.40% की रेंज में चढ़ रही है, वैसे-वैसे सुरक्षित बॉन्ड और REITs के रिटर्न के बीच का अंतर कम हो रहा है। अगर Reserve Bank of India (RBI) सख्त मौद्रिक नीति जारी रखता है, तो REITs के यूनिट प्राइस पर दबाव बढ़ना तय है।
निवेशकों को सलाह है कि वे आने वाले समय में लीज रिन्यूअल शेड्यूल और REIT यील्ड व बॉन्ड यील्ड के बीच के 'स्प्रेड' पर बारीक नजर रखें।
