क्या है रिपोर्ट का निचोड़?
Colliers India की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तिमाही (Q1 2024) में कुल 18.3 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की लीजिंग हुई। यह पिछले साल की इसी अवधि (Q1 2023) के मुकाबले 15% की जबरदस्त बढ़ोतरी है, जब यह आंकड़ा 15.9 मिलियन वर्ग फुट था। इस ग्रोथ की मुख्य वजह कंपनियों की मजबूत ऑक्यूपायर डिमांड और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का लगातार विस्तार रही। रिपोर्ट ने यह भी साफ किया कि "ग्रॉस एब्जॉर्प्शन" में सिर्फ नए ऑक्यूपाई किए गए स्पेस को गिना गया है, न कि लीज रिन्यूअल या सिर्फ लेटर ऑफ इंटेंट पर आधारित डील को।
शहर-दर-शहर प्रदर्शन: कहीं बहार, कहीं सूखा!
पूरे देश में भले ही लीजिंग बढ़ी हो, लेकिन अलग-अलग शहरों में तस्वीर काफी मिली-जुली रही।
- बेंगलुरु, जो भारत का सबसे बड़ा ऑफिस मार्केट है, में लीजिंग 18% बढ़कर 5.3 मिलियन वर्ग फुट रही।
- हैदराबाद और पुणे इस बार सबसे आगे रहे, जहां लीजिंग एक्टिविटी दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर क्रमशः 3.4 मिलियन वर्ग फुट और 2.5 मिलियन वर्ग फुट हो गई।
- मुंबई में भी 23% की बढ़ोतरी देखी गई और यह 2.7 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गया।
इसके विपरीत, दिल्ली-एनसीआर (National Capital Region) के मार्केट में 30% की भारी गिरावट आई, जो 3.3 मिलियन वर्ग फुट से घटकर 2.3 मिलियन वर्ग फुट रह गया। चेन्नई में भी 31% की कमी के साथ लीजिंग 2 मिलियन वर्ग फुट पर आ गई। वहीं, कोलकाता का मार्केट 0.1 मिलियन वर्ग फुट पर स्थिर रहा।
क्यों आई शहरों में इतनी भिन्नता?
यह बड़ा अंतर भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में अलग-अलग आर्थिक गतिशीलता को दर्शाता है। दिल्ली-एनसीआर और चेन्नई में आई तेज गिरावट के पीछे स्पेस की सैचुरेशन, बढ़ती प्रतिस्पर्धा या खास लोकल आर्थिक स्थितियां वजह हो सकती हैं। वहीं, हैदराबाद और पुणे में शानदार ग्रोथ और कोलकाता में स्थिर प्रदर्शन, विभिन्न मांग चालकों (demand drivers) और एब्जॉर्प्शन क्षमताओं की ओर इशारा करते हैं।
आगे की राह कैसी?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑक्यूपायर डिमांड और GCCs का विस्तार भविष्य में भी भारतीय ऑफिस मार्केट को सपोर्ट करता रहेगा। हालांकि, शहरों के बीच प्रदर्शन का यह उतार-चढ़ाव बताता है कि ग्रोथ लोकल इकोनॉमिक हेल्थ और मार्केट की क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से ढलने की क्षमता पर निर्भर करेगी। इन शहर-विशिष्ट ट्रेंड्स पर नजर रखना आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण होगा।