दुबई के रियल एस्टेट को मिल रहा है विदेशी पूंजी का सहारा
दुबई के प्रॉपर्टी सेक्टर में भारतीय निवेशकों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। वे अब यहाँ के सबसे बड़े विदेशी खरीदार बन गए हैं। अनुमान है कि भारतीय हर साल 35 अरब दिरहम से लेकर 40 अरब दिरहम तक का निवेश कर रहे हैं। यह बताता है कि कैसे भारत से बड़ी मात्रा में पैसा दुबई की रियल एस्टेट में जा रहा है, जो इसे ग्लोबल वेल्थ के लिए एक स्थिर और टैक्स-एफिशिएंट हब बना रहा है।
क्यों है दुबई इतना आकर्षक?
दुबई में भारतीय निवेशकों की दिलचस्पी कई वजहों से बढ़ रही है। सबसे बड़ा आकर्षण है प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट पर किसी भी तरह के इनकम टैक्स या कैपिटल गेन्स टैक्स का न होना। इससे नेट रिटर्न काफी बढ़ जाता है, खासकर भारतीय शहरों की तुलना में। इसके अलावा, दुबई में रेंटल यील्ड्स भी काफी मजबूत हैं, जो अक्सर 6% से लेकर 9% सालाना तक पहुँच जाती है।
सिर्फ पैसों के फायदे नहीं, और भी बहुत कुछ
सिर्फ पैसों के फायदे ही नहीं, दुबई निवेशकों को और भी बहुत कुछ ऑफर करता है। यहाँ प्रॉपर्टी लॉज़ पारदर्शी हैं और लीगल फ्रेमवर्क काफी स्टेबल है। वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, एक बेहतर लाइफस्टाइल और यूएई व भारत के बीच आसान ट्रैवल लिंक्स भी इसकी अपील बढ़ाते हैं। सबसे खास बात यह है कि प्रॉपर्टी में निवेश करके यहाँ की मशहूर 'गोल्डन वीज़ा' जैसी रेसिडेंसी सुविधाओं का फायदा उठाया जा सकता है, जिससे निवेशकों और उनके परिवारों को लंबी अवधि की स्थिरता मिलती है।
मार्केट की चाल और भविष्य
दुबई का प्रॉपर्टी मार्केट इस वक्त तेजी के दौर से गुजर रहा है, जहाँ प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन लगभग 916 अरब दिरहम के पार पहुँच गए हैं। डेवलपर्स भी नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रहे हैं। हाल के भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, एक्सपर्ट्स को दुबई की इकोनॉमिक रेजिलिएंस और सरकार की इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली पॉलिसीज़ पर भरोसा है। माना जा रहा है कि दुबई का रणनीतिक लोकेशन, निवेशकों के लिए आसान नीतियां और लाइफस्टाइल इसे अंतर्राष्ट्रीय पूंजी के लिए एक आकर्षण का केंद्र बनाए रखेंगे, जिसमें भारतीय खरीदारों की भूमिका लगातार बढ़ती रहेगी।