भारतीय हाउसिंग मार्केट में बड़ा बंटवारा: IT की मार से मिड-सेगमेंट सुस्त, आलीशान घरों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी!

REAL-ESTATE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारतीय हाउसिंग मार्केट में बड़ा बंटवारा: IT की मार से मिड-सेगमेंट सुस्त, आलीशान घरों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी!
Overview

साल 2026 की पहली तिमाही में भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ा डिविजन (division) देखने को मिला है। IT सेक्टर की अनिश्चितता और affordability के दबाव के चलते मध्य और किफायती घरों की बिक्री जहां धीमी पड़ी है, वहीं ₹1 करोड़ से ऊपर के लग्जरी सेगमेंट ने बिक्री में नया रिकॉर्ड कायम किया है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

IT का असर और मार्केट में सुस्ती

IT सेक्टर में चल रही छंटनी और हायरिंग फ्रीज का असर भारतीय रियल एस्टेट पर साफ दिख रहा है। नाइट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में देश के टॉप 8 शहरों में हाउसिंग सेल्स में 4% की गिरावट आई और यह 84,827 यूनिट पर आ गई। नए लॉन्च में भी 2% की कमी देखी गई। पिछले 5 साल की मजबूत ग्रोथ के बाद अब मार्केट एडजस्टमेंट (adjustment) के दौर से गुजर रहा है। अनसोल्ड इन्वेंटरी (unsold inventory) 3% बढ़कर करीब 5.2 लाख यूनिट हो गई है, खासकर नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और पुणे में यह स्थिति ज्यादा कमजोर है। अनारॉक (Anarock) के डेटा के अनुसार, टॉप 7 शहरों में बिक्री 7% घटकर 1,01,675 यूनिट रह गई। प्रोपइक्विटी (PropEquity) के आंकड़े बताते हैं कि टॉप 9 शहरों में बिक्री 13% गिरकर 98,761 यूनिट पर आ गई, जो पिछले 18 तिमाहियों में पहली बार 1 लाख यूनिट से नीचे है। जानकारों का कहना है कि जॉब सिक्योरिटी और सैलरी ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता के कारण, खासकर मध्यम वर्ग के खरीदार होम लोन जैसे लंबे वित्तीय फैसले लेने में हिचकिचा रहे हैं। पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों में गिरावट ज्यादा तेज रही है।

लग्जरी सेगमेंट में बंपर मांग!

जहां एक ओर मिड-मार्केट संघर्ष कर रहा है, वहीं रेजिडेंशियल मार्केट का अपर एंड (upper end) यानी लग्जरी सेगमेंट शानदार प्रदर्शन कर रहा है। 50 लाख रुपये से कम के सेगमेंट में 23% की गिरावट आई, जबकि 1 करोड़ रुपये और उससे ऊपर के सेगमेंट ने बिक्री में ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल की है, जो कुल बिक्री का 53% हिस्सा बन गया है। यह दिखाता है कि प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग अलग-अलग कारणों से प्रेरित है और IT सेक्टर की अस्थिरता से कम प्रभावित है। बढ़ती आय, एनआरआई (NRI) खरीदारों की बढ़ती भागीदारी और लाइफस्टाइल अपग्रेड की चाहत प्रीमियम घरों के लिए मांग को बढ़ा रही है। NCR ने लग्जरी सेगमेंट में डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की है।

डेवलपर्स की मजबूती और बेंचमार्किंग

बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स इस मिश्रित बाजार में अलग-अलग स्तर की मजबूती दिखा रहे हैं। NCR रीजन में लीडर DLF Ltd. की मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) लगभग ₹1.5 लाख करोड़ है और इसका TTM P/E रेश्यो लगभग 30.5-34.9 के बीच है। कुछ एनालिस्ट्स इसे अंडरवैल्यूड (undervalued) मान रहे हैं। गोडरेज प्रॉपर्टीज (Godrej Properties), जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹54,000 करोड़ और TTM P/E रेश्यो 30.5 से 129.81 तक है, अपने प्रीमियम प्रोजेक्ट्स और बैलेंस शीट डिसिप्लिन के लिए जानी जाती है। वहीं, प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स (Prestige Estates Projects), जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹59,000 करोड़ और P/E रेश्यो लगभग 55-67 है, बेंगलुरु में मजबूत उपस्थिति रखती है, लेकिन इसमें कुछ वित्तीय कमजोरियां हैं, जैसे इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (interest coverage ratio) का कम होना और पिछले 5 सालों में बिक्री ग्रोथ का धीमा रहना। मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) ने DLF, गोडरेज प्रॉपर्टीज और प्रेस्टीज एस्टेट्स जैसे डेवलपर्स के लिए 'Buy' रेटिंग दी है, जो 2026 तक महत्वपूर्ण अपसाइड पोटेंशियल का अनुमान लगाते हैं।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर

वर्तमान स्थिति 2008 के ग्लोबल मार्केट क्रैश जैसी नहीं है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय रियल एस्टेट ने मंदी और करेक्शन को झेला है। डिमोनेटाइजेशन (demonetization), RERA और COVID-19 महामारी जैसे घटनाओं ने मार्केट को प्रभावित किया, लेकिन डिमांड कभी खत्म नहीं हुई। IT जॉब कट्स के कारण स्टॉक में बिकवाली और अस्थायी ठहराव आ सकता है, लेकिन मजबूत इकोनॉमिक फंडामेंटल्स, अनुकूल डेमोग्राफिक्स और सरकारी समर्थन के कारण बड़े क्रैश की उम्मीद नहीं है। इन्फ्लेशन (inflation) में कमी और 2025 में संभावित RBI इंटरेस्ट रेट कट जैसे मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर, खासकर मिड-सेगमेंट खरीदारों के लिए, affordability में मदद करेंगे। हालांकि, मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव जैसी अनिश्चितताएं खरीदारों की भावनाओं को प्रभावित कर रही हैं।

जोखिम और डेवलपर्स के लिए चुनौतियां

लग्जरी सेगमेंट की मजबूती और एनालिस्ट्स के सकारात्मक आउटलुक के बावजूद, कई जोखिम बने हुए हैं। IT सेक्टर की निरंतर अस्थिरता टेक हब में मंदी को लंबा खींच सकती है। नए सप्लाई और बिक्री के बीच का अंतर, जहां Q1 2026 में इन्वेंटरी 4% QoQ बढ़ी है, कुछ माइक्रो-मार्केट में बढ़ सकता है। ग्लोबल इन्फ्लेशन के कारण बढ़ते निर्माण लागत डेवलपर्स के मार्जिन को दबा रही है और प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ा रही है। प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स को कम इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो और घटती बिक्री ग्रोथ जैसी विशिष्ट वित्तीय कमजोरियों का सामना करना पड़ रहा है।

सेक्टर का आउटलुक

आगे चलकर, भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में गति बने रहने की उम्मीद है, जिसमें कमर्शियल और रेजिडेंशियल दोनों की मांग मजबूत बनी रहेगी। शहरीकरण, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रीमियम एसेट्स की बढ़ती प्राथमिकताएं इसका मुख्य कारण हैं। IT जॉब कट्स से शॉर्ट-टर्म में कुछ टेक हब में सेंटीमेंट प्रभावित हो सकता है, लेकिन ब्रॉडर मार्केट में स्थिरीकरण (stabilization) और निरंतर ग्रोथ की उम्मीद है, खासकर हाई-एंड और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट सेगमेंट में। कुल मिलाकर, यह एक परिपक्व बाजार (maturing market) का पुन: कैलिब्रेशन (recalibration) है, न कि एक स्ट्रक्चरल मंदी का शिकार।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.