भारतीय कंपनियां अब फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की तरफ तेजी से रुख कर रही हैं। साल 2026 तक इन दफ्तरों में औसत सीट की मांग दोगुनी होकर **55** तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें BFSI सेक्टर सबसे आगे है।
कॉर्पोरेट जगत की बदली रणनीति
फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस अब सिर्फ स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं रह गया है। आज बड़ी भारतीय कंपनियां कुल बाजार मांग का 23.4% हिस्सा संभाल रही हैं। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनियां अब पारंपरिक लंबी अवधि की लीज (Lease) के भारी खर्च के बजाय ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी (Operational Agility) को प्राथमिकता दे रही हैं।
आंकड़ों में समझें बदलाव
आंकड़े बताते हैं कि बड़ी कंपनियों के लिए औसत सीट की मांग साल 2023 की 25 सीटों से बढ़कर 2026 तक 55 सीटों तक पहुंचने का अनुमान है। इससे साफ है कि दिग्गज कंपनियां अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लागत को घटाकर स्केलेबल (Scalable) मॉडल्स की ओर बढ़ रही हैं।
BFSI बनाम IT सेक्टर
इस दौड़ में BFSI सेक्टर सबसे बड़े ड्राइवर के रूप में उभरा है। 2023 के मुकाबले इस सेक्टर की मांग 2.7 गुना बढ़ी है, जिससे यह नौवें स्थान से छलांग लगाकर दूसरे स्थान पर आ गया है। वहीं, कमर्शियल स्पेस में दशकों से राज कर रहे IT और ITeS सेक्टर की हिस्सेदारी 43.9% पर है, लेकिन चार वर्षों में पहली बार इसमें गिरावट दर्ज की गई है।
स्टार्टअप्स में AI का असर
दिलचस्प बात यह है कि स्टार्टअप्स की मांग में कमी आई है—इनके लिए औसत सीट की जरूरत 22 (साल 2023) से घटकर 13 (साल 2026) रह गई है। इसके पीछे मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लीनर ऑपरेटिंग मॉडल का तेजी से अपनाया जाना है।
निवेशकों और कमर्शियल प्रॉपर्टी मालिकों के लिए यह संकेत साफ है: अब बाजार में वही टिकेगा जो ESG-अनुपालन और बेहतर सर्विस-ओरिएंटेड लीजिंग मॉडल पेश कर सकेगा।
