Indian Buyers Stretch Budgets for Bigger Homes Amid Rising Costs

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Buyers Stretch Budgets for Bigger Homes Amid Rising Costs
Overview

आर्थिक चिंताओं और बढ़ती लागतों के बावजूद, भारतीय खरीदार बड़े घर और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स खरीद रहे हैं। डेवलपर्स वैश्विक सप्लाई चेन की दिक्कतों और कंस्ट्रक्शन की बढ़ती लागतों के कारण भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी की चेतावनी दे रहे हैं, जिससे खरीदार मौजूदा कीमतों पर घर खरीदने का मौका चूकने से डर रहे हैं।

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खरीदार बढ़ा रहे बजट, ले रहे हैं बड़े और प्रीमियम घर

भारतीय रियल एस्टेट बाजार में एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है। आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ती महंगाई के बावजूद, खरीदार बड़े घरों, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स और बेहतर लाइफस्टाइल वाली प्रॉपर्टीज़ पर अपना बजट बढ़ाने को तैयार हैं। डेवलपर्स का मानना है कि सप्लाई चेन में दिक्कतें और कंस्ट्रक्शन की बढ़ती लागतों के चलते भविष्य में कीमतें और बढ़ सकती हैं, ऐसे में खरीदार मौजूदा दामों पर अच्छे प्रोजेक्ट्स खरीदने का मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते।

'अपग्रेड प्रेशर' दे रहा डिमांड को बूस्ट

मुंबई, बेंगलुरु, गुरुग्राम और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के डेवलपर्स प्रीमियम अपार्टमेंट्स और बड़े रेजिडेंस की मजबूत मांग की रिपोर्ट कर रहे हैं। खरीदार अब सिर्फ निवेश के नजरिए से नहीं, बल्कि बेहतर जीवन स्तर, सामुदायिक जीवन और लंबे समय तक चलने वाले लाइफस्टाइल को प्राथमिकता दे रहे हैं। डबल इनकम वाले परिवार और अपर-मिडिल क्लास के लिए, घर खरीदना वित्तीय सुरक्षा और तरक्की का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गया है। Puravankara के आंकड़ों के अनुसार, टॉप शहरों में ₹1 करोड़ से ऊपर के घरों की बिक्री लगभग 53% रही, जो प्रीमियम प्रॉपर्टीज़ के प्रति स्पष्ट झुकाव दिखाता है।

बढ़ती लागतों का प्रीमियम मार्केट पर असर

प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में यह मजबूत परफॉर्मेंस ऐसे समय में आई है जब कंस्ट्रक्शन और लॉजिस्टिक्स की लागतें लगातार बढ़ रही हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधाओं, शिपिंग रूट बदलने और फ्रेट चार्ज बढ़ने के कारण इम्पोर्टेड मटेरियल (आयातित सामग्री) की लागत में इजाफा हुआ है। स्टील की कीमतों में भारी उछाल आया है, और लग्जरी प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड मार्बल और हाई-एंड फिक्स्चर भी महंगे हो गए हैं। खासकर साउथ मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु के कुछ हिस्सों जैसे प्रीमियम बाज़ारों में यह स्थिति और गंभीर है, जो इम्पोर्टेड गुड्स पर ज्यादा निर्भर हैं। इन इलाकों के खरीदार अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर उन्होंने जल्दबाजी नहीं की तो उनके सपनों के घर की कीमत पहुंच से बाहर हो सकती है।

भरोसेमंद ब्रांड्स पर बढ़ता भरोसा

खरीदार अब उन डेवलपर्स को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत है और जिनका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है। प्रोजेक्ट्स में देरी या रुके हुए प्रोजेक्ट्स के पिछले अनुभवों के कारण, खरीदार और जमीन मालिक अब उन डेवलपर्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो अपनी विश्वसनीयता, मजबूत गवर्नेंस और वित्तीय अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। Arvind SmartSpaces, DLF, Embassy Developments और SignatureGlobal जैसी कंपनियों ने इस ट्रेंड को महसूस किया है। यह इस बात का संकेत है कि अब प्रॉपर्टी की कीमत के साथ-साथ डेवलपर का ब्रांड और उसकी प्रतिष्ठा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। खरीदार अब प्रोजेक्ट में देरी के जोखिम को मोल लेने के बजाय, बेहतर प्रॉपर्टी के लिए ज्यादा निवेश करने को तैयार दिख रहे हैं।

प्रीमियम सेगमेंट, अफोर्डेबल हाउसिंग से आगे

डेवलपर्स प्रीमियम और अफोर्डेबल हाउसिंग मार्केट के बीच एक स्पष्ट अंतर देख रहे हैं। जहां DLF ने एक तिमाही में अपने Dahlias प्रोजेक्ट में 32 अपार्टमेंट बेचे और Embassy Developments ने साउथ मुंबई के एक लग्जरी प्रोजेक्ट में ₹800 करोड़ के करीब प्री-सेल्स हासिल किए, वहीं अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। उदाहरण के लिए, Mahindra Lifespaces अफोर्डेबल हाउसिंग पर अपना फोकस कम करने पर विचार कर रहा है, क्योंकि डिमांड प्रीमियम डेवलपमेंट्स की ओर शिफ्ट हो रही है। यह अंतर दिखाता है कि बाजार न केवल आर्थिक सावधानी से प्रभावित हो रहा है, बल्कि खरीदारों का यह विश्वास भी बढ़ रहा है कि घर खरीदने में देरी का मतलब भविष्य में बहुत अधिक लागत वहन करना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.