Indiabulls का रियल एस्टेट पर दांव लगा, FY26 में ₹346 करोड़ का मुनाफा!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indiabulls का रियल एस्टेट पर दांव लगा, FY26 में ₹346 करोड़ का मुनाफा!

Indiabulls Limited के लिए FY26 शानदार रहा, कंपनी ने **₹346 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है। यह कंपनी के रियल एस्टेट में बढ़ते फोकस का नतीजा है, जिसने **₹2,752 करोड़** की सेल्स बुकिंग हासिल की है। अब कंपनी दिल्ली-NCR, मुंबई और लुधियाना में अपने **₹21,000 करोड़** के डेवलपमेंट पाइपलाइन को और बढ़ाने की योजना बना रही है।

Detailed Coverage

रियल एस्टेट बना ग्रोथ का इंजन

Indiabulls Limited ने FY26 में ₹880 करोड़ के कुल रेवेन्यू पर ₹346 करोड़ का आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट (Profit After Tax) दर्ज किया है। यह कंपनी के लंबे समय से चल रहे रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) का असर है, जिसने इसके बिजनेस को पुराने ऑपरेशन्स से हटाकर रेजिडेंशियल रियल एस्टेट डेवलपमेंट पर केंद्रित किया है।

कंपनी का रियल एस्टेट डिवीजन अब ग्रोथ का मुख्य जरिया बन गया है। फाइनेंशियल ईयर के आखिरी तिमाही में अकेले इस डिवीजन ने ₹143 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट (Operating Profit) दिया। FY26 के दौरान, कंपनी ने 21.6 लाख वर्ग फुट में फैले 909 यूनिट्स की बिक्री से ₹2,752 करोड़ की बुकिंग हासिल की। कंपनी का रेजिडेंशियल पोर्टफोलियो प्रीमियम सेगमेंट को टारगेट करता है, जहां यूनिट की कीमतें ₹2 करोड़ से ₹6 करोड़ के बीच हैं। फिलहाल, कंपनी के पास 110.52 लाख वर्ग फुट में फैली ₹21,000 करोड़ से ज्यादा की ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (Gross Development Value) वाली पाइपलाइन है।

इस ग्रोथ में प्रमुख प्रोजेक्ट्स जैसे द्वारका एक्सप्रेसवे पर स्थित Indiabulls Estate & Club और Indiabulls Heights, और खरखोदा में Indiabulls Green Avenue प्रोजेक्ट का अहम योगदान है। कंपनी अब मुंबई और लुधियाना में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी में है।

फाइनेंशियल सर्विसेज का सहारा

रियल एस्टेट के अलावा, कंपनी के फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस ने भी इस साल बैलेंस शीट को सहारा दिया है। स्टॉक ब्रोकिंग (Stockbroking) सेगमेंट ने FY26 में ₹124.4 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो कि आखिरी तिमाही में पिछले साल की तुलना में 26% की ग्रोथ दर्शाता है। यह डिवीजन ₹68,000 करोड़ से अधिक के क्लाइंट एसेट्स (Client Assets) को मैनेज करता है। वहीं, एसेट रिकंस्ट्रक्शन (Asset Reconstruction), डिजिटल लेंडिंग (Digital Lending) और पेमेंट सर्विसेज (Payment Services) जैसे अन्य फाइनेंशियल आर्म्स (Financial Arms) भी कंपनी के रेवेन्यू में स्थिरता बनाए हुए हैं।

आगे क्या उम्मीद करें?

पिछले साल, फाउंडर समीर गहलोत (Sameer Gehlaut) ने ₹400 करोड़ से अधिक के वारंट्स (Warrants) को सब्सक्राइब करके कंपनी की नई स्ट्रेटेजी पर भरोसा जताया था। हाल के समय में रियल एस्टेट सेक्टर में डिमांड बढ़ी है, लेकिन निवेशकों की नजर बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के जोखिमों पर रहती है, खासकर द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे कॉरिडोर और खरखोदा जैसे उभरते हब में। कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) को बनाए रखने की क्षमता, जो कि आखिरी तिमाही में 46.4% तक बढ़ी थी, इन प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक बढ़ाने और कंस्ट्रक्शन कॉस्ट (Construction Costs) को मैनेज करने पर निर्भर करेगी। ₹21,000 करोड़ की मौजूदा पाइपलाइन से प्रोजेक्ट टाइमलाइन (Project Timelines) और कैश कलेक्शन (Cash Collection) पर आने वाले अपडेट्स इस ग्रोथ की लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी (Long-term Sustainability) को ट्रैक करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.