साल 2026 की पहली छमाही में भारत के टॉप 8 शहरों में इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग लीजिंग में 12% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल मिलाकर करीब 2.2 करोड़ वर्ग फुट (22 million sq ft) जगह लीज पर दी गई। इस उछाल में दिल्ली-NCR और चेन्नई सबसे आगे रहे, जिन्होंने कुल ग्रेड A स्पेस की मांग का 45% से ज्यादा हिस्सा अपने नाम किया। ई-कॉमर्स, ऑटोमोटिव और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मजबूत गतिविधियां और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी इस ग्रोथ की मुख्य वजहें हैं।
भारत का वेयरहाउसिंग मार्केट हुआ और भी मजबूत!
साल 2026 की पहली छमाही में भारत का इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग मार्केट शानदार परफॉरमेंस जारी रखे हुए है। देश के आठ प्रमुख शहरों में लीजिंग एक्टिविटी करीब 2.2 करोड़ वर्ग फुट (22 million sq ft) तक पहुंच गई, जो 2025 की पहली छमाही की तुलना में 12% ज्यादा है। यह ग्रोथ सप्लाई चेन के लगातार विस्तार और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग व कंजम्पशन को सपोर्ट करने के लिए मॉडर्न, ग्रेड A लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की बढ़ती जरूरत को साफ दर्शाती है।
दिल्ली-NCR और चेन्नई की लीड
इस ग्रोथ के पीछे दिल्ली-NCR और चेन्नई सबसे बड़े इंजन बनकर उभरे हैं। इन दोनों शहरों ने मिलकर इस दौरान लीज पर दिए गए कुल ग्रेड A स्पेस का 45% से ज्यादा हिस्सा अपने नाम किया। इन रीजन्स को पहले से स्थापित लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और बड़े कंजम्पशन व प्रोडक्शन सेंटर्स से नजदीक होने का फायदा मिलता है, जिससे ये बड़े ऑपरेशंस के लिए पसंदीदा जगह बन गए हैं। इनके अलावा, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी 20 लाख वर्ग फुट (2 million sq ft) से ज्यादा की लीजिंग दर्ज की गई, जो पूरे भारत के इंडस्ट्रियल हब में मांग की मजबूती को दिखाता है।
ई-कॉमर्स और ऑटो का दबदबा
इस लीजिंग एक्टिविटी में कई सेक्टर्स का योगदान रहा। 2 लाख वर्ग फुट (200,000 sq ft) से बड़े ट्रांजैक्शन्स कुल लीजिंग वॉल्यूम का लगभग 40% रहे। ई-कॉमर्स सेक्टर मांग में सबसे आगे रहा, जिसने कुल मांग का 30% से ज्यादा हिस्सा कवर किया। वहीं, ऑटोमोटिव और थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स सेक्टर्स में से हर एक ने 20% से ज्यादा का योगदान दिया। बड़े पैमाने पर हुए इन डील्स से पता चलता है कि कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए कंसोलिडेटेड और एफिशिएंट वेयरहाउसिंग सॉल्यूशंस को प्राथमिकता दे रही हैं।
छोटे शहरों में भी बूम
बड़े शहरों के अलावा, टियर-II और अन्य इंडस्ट्रियल शहरों में भी तेजी देखी जा रही है। पुणे, अहमदाबाद और कोलकाता जैसे शहरों ने 30% से ज्यादा की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की। इसकी वजह कंपनियां कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और उभरते हुए इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स में लेबर की आसान उपलब्धता की तलाश कर रही हैं। सरकार की 'पीएम गति शक्ति' प्रोग्राम, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर इनिशिएटिव्स साल के बाकी हिस्से में इन रीजन्स को और मजबूत करेंगे।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
सकारात्मक रुझान के बावजूद, निवेशकों को कुछ संभावित चुनौतियों पर भी नजर रखनी चाहिए। ओवरऑल डिमांड मजबूत है, लेकिन सप्लाई चेन में अस्थिरता के कारण मार्केट के विस्तार पर दबाव आ सकता है, जैसा कि दूसरी तिमाही में लीजिंग में 1% की मामूली गिरावट में देखा गया। इसके अलावा, भविष्य का परफॉरमेंस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के सफल कार्यान्वयन और डेवलपर्स की रेंटल यील्ड बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा। ग्रोथ की टिकाऊपन को समझने के लिए ग्रेड A पार्क्स में ऑक्यूपेंसी लेवल्स और लीज रिन्यूअल पैटर्न पर नजर रखना जरूरी होगा।
