India Warehousing Leasing: H1 2026 में 2.19 करोड़ वर्ग फुट का आंकड़ा पार, पर खाली दरें बढ़ीं

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Warehousing Leasing: H1 2026 में 2.19 करोड़ वर्ग फुट का आंकड़ा पार, पर खाली दरें बढ़ीं

साल 2026 की पहली छमाही में भारत के इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेक्टर में लीजिंग (Leasing) 12% बढ़कर 2.19 करोड़ वर्ग फुट पर पहुंच गई है। हालांकि, नई सप्लाई लीजिंग से ज्यादा रही, जिससे खाली दरें बढ़कर 17.2% हो गई हैं। ऐसे में निवेशकों को रेंटल ग्रोथ पर नजर रखनी होगी।

भारत में वेयरहाउसिंग सेक्टर का प्रदर्शन

साल 2026 की पहली छमाही में भारत के इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेक्टर ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कुल लीजिंग एक्टिविटी (Leasing Activity) 12% बढ़कर 2.19 करोड़ वर्ग फुट हो गई है। टॉप 8 शहरों में कंपनियों ने इतनी जगह लीज पर ली है, जो कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से उत्पन्न ग्लोबल सप्लाई चेन के दबाव के बावजूद मजबूत डिमांड को दिखाता है।

प्रमुख बाजार और सेक्टर की मांग

दिल्ली NCR और चेन्नई इस दौरान सबसे सक्रिय बाजार रहे, जिन्होंने मिलकर कुल लीजिंग का 45% से अधिक हिस्सा कवर किया। दिल्ली NCR में अकेले 59 लाख वर्ग फुट और चेन्नई में 41 लाख वर्ग फुट ग्रेड A स्पेस की डिमांड देखी गई। थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स फर्मों ने कुल लीज्ड एरिया का 30% हिस्सा लिया, जो मांग का मुख्य जरिया रही। इसके अलावा, इंजीनियरिंग (Engineering) कंपनियों ने 21% और ई-कॉमर्स (E-commerce) प्लेयर्स ने 16% की हिस्सेदारी निभाई। खास बात यह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की लीजिंग डिमांड पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी होकर 14 लाख वर्ग फुट पर पहुंच गई, जो मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की बदलती प्राथमिकताओं का संकेत देता है।

बढ़ी हुई सप्लाई का खाली दरों पर असर

हालांकि लीजिंग एक्टिविटी मजबूत रही, पर कंस्ट्रक्शन (Construction) की रफ्तार और तेज हो गई। डेवलपर्स ने 2026 की पहली छमाही में 2.47 करोड़ वर्ग फुट नया ग्रेड A इंडस्ट्रियल और वेयरहाउस स्पेस तैयार किया, जो पिछले साल के मुकाबले 27% ज्यादा है। क्योंकि यह नई सप्लाई, लीज पर लिए गए कुल एरिया से तेज रफ्तार से बढ़ी, बाजार में खाली जगहों की दर (Vacancy Rate) जून 2026 के अंत तक बढ़कर 17.2% हो गई। आमतौर पर, खाली दरों का बढ़ना रेंटल ग्रोथ (Rental Growth) पर दबाव डाल सकता है, खासकर अगर आने वाली तिमाहियों में सप्लाई डिमांड से लगातार ज्यादा बनी रहती है।

भविष्य का अनुमान और निवेशकों के लिए अहम बातें

खाली जगहों के ऊंचे स्तर के बावजूद, प्रमुख इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स में रेंटल रेट्स में बढ़ोतरी का रुख बना हुआ है। इसका मुख्य कारण आधुनिक, प्रीमियम ग्रेड A फैसिलिटीज़ का उपलब्ध होना है, जो ज्यादा वैल्यू वाले टेनेंट्स को आकर्षित करते हैं। डेवलपर्स का पाइपलाइन सक्रिय है, और उम्मीद है कि साल के अंत तक नया ग्रेड A सप्लाई 4.5 से 5 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच सकता है। निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि क्या डिमांड का स्तर इस आक्रामक सप्लाई विस्तार के साथ तालमेल बिठा पाता है। अगर नए स्पेस की भारी पाइपलाइन के साथ ऑक्यूपेंसी डिमांड धीमी होती है, तो यह रेंटल यील्ड (Rental Yield) को स्थिर कर सकता है या उस पर दबाव डाल सकता है, जो रियल एस्टेट डेवलपर्स और वेयरहाउसिंग एसेट मैनेजर्स के लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट के लिए बेहद जरूरी है।

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