India Warehousing Leasing: 2026 की पहली छमाही में **15%** की उछाल, 3.68 करोड़ वर्ग फुट पर पहुंची लीजिंग

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Warehousing Leasing: 2026 की पहली छमाही में **15%** की उछाल, 3.68 करोड़ वर्ग फुट पर पहुंची लीजिंग

भारत के इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेक्टर में 2026 की पहली छमाही के दौरान लीजिंग एक्टिविटी में **15%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई। यह 3.68 करोड़ वर्ग फुट तक पहुँच गई। मैन्युफैक्चरिंग और थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) की मजबूत मांग इस ग्रोथ की मुख्य वजह रही। हालांकि, मुंबई ने रिकॉर्ड ट्रांजैक्शन वॉल्यूम दर्ज किया, लेकिन निवेशकों को कुछ मार्केट्स में वेकेंसी रेट की क्षेत्रीय असमानताओं और लिमिटेड ग्रेड A सप्लाई पर नज़र रखनी होगी।

भारत के वेयरहाउसिंग सेक्टर में तेज़ी

2026 की पहली छमाही में भारत के इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेक्टर ने अपनी पॉजिटिव गति बनाए रखी, जिसमें लीजिंग एक्टिविटी 3.68 करोड़ वर्ग फुट तक पहुँच गई। यह 2025 की इसी अवधि की तुलना में 15% की वृद्धि दर्शाता है। इस ग्रोथ के पीछे मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत विस्तार और सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन के लिए थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) प्रोवाइडर्स पर बढ़ती निर्भरता रही।

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां मुख्य ऑक्यूपायर्स बनी रहीं, जिन्होंने कुल ट्रांजैक्शन का 46% हिस्सा कवर किया और 1.7 करोड़ वर्ग फुट लीज पर लिया। इस सेगमेंट के भीतर, ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रीज का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं, 3PL प्रोवाइडर्स ने कुल वॉल्यूम का 30% हिस्सा लिया, 1.11 करोड़ वर्ग फुट लीज पर लिया, जो लागत प्रबंधन और स्केलिंग के लिए लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस को आउटसोर्स करने की ओर निरंतर बदलाव का संकेत देता है।

मुंबई में रिकॉर्ड एक्टिविटी

मुंबई इस दौरान सबसे मजबूत मार्केट बनकर उभरा, जिसने 1.07 करोड़ वर्ग फुट के ट्रांजैक्शन दर्ज किए, जो कि इसका अब तक का सबसे बड़ा हाफ-ईयरली वॉल्यूम है। इस अकेले मार्केट ने भारत के आठ प्रमुख इंडस्ट्रियल हब में कुल लीजिंग का लगभग 29% हिस्सा कवर किया। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरा होने जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर एडवांसमेंट्स ने इस क्षेत्र में ऑक्यूपायर्स को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अन्य प्रमुख मार्केट्स में भी ग्रोथ देखी गई। नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में लीजिंग 17% बढ़कर 59 लाख वर्ग फुट हो गई, जबकि बेंगलुरु में 36% की उछाल के साथ 40 लाख वर्ग फुट दर्ज किया गया। कोलकाता में सबसे तेज प्रतिशत ग्रोथ 69% रही, जो कुल 24 लाख वर्ग फुट तक पहुंची। अहमदाबाद में भी 15% की बढ़ोतरी के साथ 41 लाख वर्ग फुट की स्थिर ग्रोथ बनी रही।

क्षेत्रीय असमानताएं और ऑपरेशनल जोखिम

हालांकि समग्र ट्रेंड ऊपर की ओर है, इस सेक्टर को अलग-अलग क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चेन्नई में, ग्रेड A वेयरहाउस स्पेस की सीमित उपलब्धता के कारण लीजिंग एक्टिविटी की ग्रोथ बाधित हुई। पुणे और हैदराबाद में नई लीजिंग वॉल्यूम में गिरावट देखी गई। विशेष रूप से हैदराबाद में, उच्च वेकेंसी रेट की समस्या बनी हुई है, जो अल्पावधि में रेंटल ग्रोथ और प्रॉपर्टी अट्रैक्टिवनेस को प्रभावित कर सकती है।

अधिकांश प्रमुख मार्केट्स में रेंटल वैल्यूज़ में बढ़ोतरी देखी गई, जिसमें चेन्नई ने 7% की उच्चतम एनुअल रेंटल ग्रोथ दर्ज की, जो ₹25.7 प्रति वर्ग फुट प्रति माह रही। पुणे इंडस्ट्रियल स्पेस के लिए सबसे महंगा मार्केट बना रहा, जिसकी कीमत ₹28.7 प्रति वर्ग फुट प्रति माह रही।

वेयरहाउसिंग सेक्टर में इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट ने भी लॉन्ग-टर्म कॉन्फिडेंस का संकेत दिया, जो 2026 की पहली छमाही में 53% की ईयर-ऑन-ईयर बढ़ोतरी के साथ $49 मिलियन तक पहुंच गया। हालांकि, यह सेक्टर ग्लोबल इकोनॉमिक फैक्टर्स के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, जिसमें एलिवेटेड फ्रेट कॉस्ट और जियोपॉलिटिकल रिस्क शामिल हैं जो ट्रेड वॉल्यूम को प्रभावित कर सकते हैं।

निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए, भविष्य में निगरानी योग्य प्रमुख बिंदु इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की गति, चेन्नई जैसे सीमित बाजारों में मांग को पूरा करने के लिए डेवलपर्स की हाई-क्वालिटी ग्रेड A स्पेस प्रदान करने की क्षमता, और हैदराबाद जैसे शहरों में वेकेंसी लेवल का विकास शामिल होगा। रेंटल ट्रेंड्स और मैन्युफैक्चरिंग तथा 3PL सेक्टर्स की निरंतर अवशोषण क्षमता की निगरानी इस ग्रोथ साइकिल की सस्टेनेबिलिटी पर और अधिक स्पष्टता प्रदान करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.