ऊर्जा दक्षता बनी भारत के लिए आर्थिक चालक
भारत में मौजूदा इमारतों में ही देश की 24% से ज्यादा बिजली की खपत हो जाती है। यह आंकड़ा तेजी से बढ़ने वाला है, क्योंकि अगले 10 सालों में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल 8% से बढ़कर 40% तक पहुंचने की उम्मीद है। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (Bureau of Energy Efficiency - BEE) ऊर्जा दक्षता को सिर्फ एक पर्यावरण पहल के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रमुख आर्थिक उत्प्रेरक (Economic Driver) के रूप में इस्तेमाल करने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है।
भारत का हाउसिंग कोड बड़ी ऊर्जा बचत का वादा करता है
भारत का यह आवासीय बिल्डिंग कोड, 'Eco-Niwas Samhita' (ENS), बिल्डिंग डिज़ाइन के लिए न्यूनतम मानक तय करता है। इसमें इन्सुलेशन (Insulation), वेंटिलेशन (Ventilation) और एनर्जी सिस्टम (Energy System) जैसी चीजें शामिल हैं। इन बुनियादी बातों पर ध्यान केंद्रित करके, इस कोड का लक्ष्य कूलिंग (Cooling) के लिए बिजली की मांग में अनुमानित 20% से 30% तक की कटौती करना है। ये सुधार बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के लिए भविष्य में होने वाले अरबों रुपये के निवेश को टालने में मदद कर सकते हैं। डेवलपर्स को शुरुआती प्रोजेक्ट लागत (Project Cost) कम होने का भी लाभ मिलेगा।
वित्तीय प्रोत्साहन ग्रीन बिल्डिंग को अपनाने को बढ़ावा देते हैं
इन मानकों को तेजी से अपनाने के लिए, ENS कार्यक्रम में वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentives) शामिल हैं। उच्च रेटिंग वाले प्रोजेक्ट बनाने वाले डेवलपर्स को नेशनल हाउसिंग बैंक (National Housing Bank) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) जैसी संस्थाओं की ESG-लिंक्ड लेंडिंग (ESG-linked lending) के माध्यम से रियायती कंस्ट्रक्शन फाइनेंस (Concessional Construction Finance) मिल सकता है। इससे उनके उधार लेने की लागत (Borrowing Cost) 0.25% से 0.50% तक कम हो सकती है। खरीदारों के लिए, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और HDFC बैंक जैसे प्रमुख बैंक ग्रीन होम लोन (Green Home Loan) देने पर विचार कर रहे हैं या दे रहे हैं। इससे ब्याज दरों में लगभग 0.05% से 0.10% की छूट मिल सकती है, जिससे मासिक मोर्गेज पेमेंट (Monthly Mortgage Payment) कम हो जाएगा।