भारत के रिटेल रियल एस्टेट मार्केट में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। 2026 के पहले नौ महीनों में लीजिंग एक्टिविटी में **19%** का उछाल आया है, जहां कुल **5.8 मिलियन वर्ग फीट** स्पेस किराए पर लिया गया है।
घरेलू ब्रांडों का दम
दिलचस्प बात यह है कि बाजार में इस तेजी को मुख्य रूप से घरेलू ब्रांड आगे बढ़ा रहे हैं। नई लीजिंग एक्टिविटी में इन ब्रांडों की हिस्सेदारी 73% रही है। यह दिखाता है कि भारतीय रिटेलर्स वर्तमान के उतार-चढ़ाव भरे माहौल के बावजूद अपने फिजिकल स्टोर नेटवर्क के विस्तार पर बड़ा दांव खेल रहे हैं। डिमांड मुख्य रूप से फैशन, अपैरल, और फूड एंड बेवरेज कैटेगरी में देखी जा रही है।
प्रमुख शहरों का दबदबा
लीजिंग वॉल्यूम का 67% हिस्सा केवल दिल्ली-NCR, मुंबई और हैदराबाद में केंद्रित रहा है। केवल जुलाई से सितंबर की तिमाही में ही 2 मिलियन वर्ग फीट स्पेस की लीजिंग हुई है। जैसे-जैसे प्राइम मॉल्स में वैकेंसी कम हो रही है, डेवलपर्स अब पेरिफेरल (बाहरी) इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसे नई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का सपोर्ट मिल रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम और संकेत
निवेशकों के लिए यह एक मिला-जुला संकेत है। जिन रियल एस्टेट डेवलपर्स के पास प्राइम मॉल्स का बड़ा पोर्टफोलियो है, उन्हें लगातार रेंटल इनकम का फायदा मिल सकता है। हालांकि, रिटेलर्स के मार्जिन पर दबाव का जोखिम बना हुआ है। यदि कंज्यूमर स्पेंडिंग में कमी का दौर लंबा खिंचता है, तो रिटेलर्स के लिए महंगे रेंट चुकाना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या रिटेलर्स अपनी सेल्स डेंसिटी बनाए रख पाते हैं और क्या डेवलपर्स समय पर अपने 'ग्रेड A' प्रोजेक्ट्स पूरे कर पाते हैं।
