भारत में रिटेल लीजिंग (Retail Leasing) ने पिछले 4 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 2026 की पहली छमाही में 6.27 मिलियन वर्ग फुट एरिया लीज पर दिया गया। यह तब हुआ जब नए मॉल्स की सप्लाई में 64% की भारी गिरावट आई, जिससे खाली जगहों (Vacancies) का प्रतिशत घटकर 11.15% रह गया। यह ट्रेंड ग्राहकों की ज़बरदस्त डिमांड और घरेलू रिटेलर्स के विस्तार की ओर इशारा कर रहा है।
रिटेल सेक्टर में दिखी ज़बरदस्त रौनक
2026 की पहली छमाही में भारतीय रिटेल रियल एस्टेट सेक्टर (Indian organized retail real estate sector) में खासी हलचल देखी गई। टॉप 7 शहरों में लीजिंग वॉल्यूम 6.27 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गया, जो पिछले 4 सालों का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले साल की तुलना में यह 10.5% की बढ़ोतरी है। वहीं, नए मॉल्स की सप्लाई में 64% की भारी कमी आई, जो केवल 0.82 मिलियन वर्ग फुट रही।
खाली जगहों में आई कमी, मॉल्स की बढ़ी अहमियत
सप्लाई और डिमांड के इस असंतुलन के कारण खाली जगहों (Vacancies) में भी कमी आई है। जून 2026 के अंत तक यह 45 बेसिस पॉइंट घटकर 11.15% पर आ गई। जैसे-जैसे जगह मिलना मुश्किल हो रहा है, शॉपिंग मॉल्स का लीजिंग में हिस्सा बढ़कर 43.1% हो गया है, जो पिछले साल 38.9% था। इससे पता चलता है कि रिटेलर्स छोटी या कम व्यवस्थित जगहों के बजाय स्थापित मॉल्स को ज़्यादा तरजीह दे रहे हैं।
प्रमुख शहरों का हाल और कोलकाता की रफ्तार
इस लीजिंग वॉल्यूम में मुंबई, दिल्ली NCR और बेंगलुरु का दबदबा रहा, जिन्होंने कुल वॉल्यूम का 75% से ज़्यादा हिस्सा कवर किया। मुंबई 29% शेयर के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद दिल्ली NCR (24%) और बेंगलुरु (23%) का नंबर आया। इन बड़े शहरों के अलावा, कोलकाता में लीजिंग वॉल्यूम में सबसे तेज़ बढ़ोतरी देखी गई, जो पिछले साल के मुकाबले 87.3% बढ़ा।
घरेलू रिटेलर्स का बढ़ता दबदबा
इस ग्रोथ का मुख्य ज़रिया घरेलू रिटेलर्स (Domestic retailers) ही बने हुए हैं, जिन्होंने नई लीज पर ली गई जगह का 79.1% हिस्सा ऑक्यूपाई किया। हालांकि, नए इंटरनेशनल ब्रांड्स की एंट्री थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन मौजूदा ग्लोबल रिटेलर्स एक्टिव हैं और उनका लीजिंग फुटप्रिंट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 62.1% बढ़ा है।
डेवलपर्स की नई रणनीति और भविष्य की योजना
जगह की कमी को देखते हुए डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स को लेकर अपनी रणनीति बदल रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब केवल जगह बढ़ाने पर नहीं, बल्कि हाई-क्वालिटी, मिक्स्ड-यूज़ (Mixed-use) इकोसिस्टम बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है, जो 'एक्सपीरिएंशियल शॉपिंग' (Experiential shopping) का अनुभव दे सकें। यह कदम ग्राहकों की बदलती उम्मीदों को पूरा करने और किरायेदारों के लिए बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
लॉन्ग-टर्म सप्लाई का आउटलुक (Long-term supply outlook) निवेशकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। टॉप 7 शहरों में फिलहाल करीब 45.5 मिलियन वर्ग फुट शॉपिंग मॉल स्पेस पर काम चल रहा है, जो 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की रफ्तार बाजार को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाएगी। निवेशकों को इन बड़े डेवलपमेंट पाइपलाइन के एग्जीक्यूशन पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि प्रोजेक्ट में देरी या लागत बढ़ने से मौजूदा सप्लाई का दबाव बना रह सकता है। वहीं, मॉल्स के समय पर शुरू होने से रेंटल ग्रोथ (Rental growth) और वेकेंसी रेट्स (Vacancy rates) में स्थिरता आ सकती है।
