Crisil Ratings ने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि इंडियन रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट, जिसने पेंडेमिक के बाद ज़बरदस्त तेजी देखी थी, अब धीमी रफ़्तार की ओर बढ़ रहा है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 में सेल्स वैल्यू ग्रोथ घटकर सिर्फ 4-6% रह जाएगी। यह फाइनेंशियल ईयर 2022 से 2025 के बीच हर साल दर्ज की गई 26% की औसतन वृद्धि से काफी अलग तस्वीर पेश करता है। इससे पहले, फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए ग्रोथ 5-7% रहने का अनुमान था।
क्यों आएगी मंदी? डिमांड और कीमतों का असर
इस मंदी की कई वजहें बताई जा रही हैं। प्रॉपर्टी की ऊँची कीमतें वॉल्यूम डिमांड को स्थिर बनाए हुए हैं, वहीं बड़े शहरों में नए प्रोजेक्ट लॉन्च के लिए अप्रूवल मिलने में हो रही देरी नए प्रोजेक्ट्स को टाल रही है। फाइनेंशियल ईयर 2027 में एवरेज सेलिंग प्राइस ग्रोथ भी घटकर 3-5% रहने का अनुमान है, जो हालिया उछाल से काफी कम है। खरीदारों का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है, और डिमांड ग्रोथ के 0-2% पर स्थिर रहने की आशंका है।
इन्वेंट्री बढ़ेगी, लक्ज़री सेगमेंट की मांग मजबूत
नतीजतन, बिना बिकी हाउसिंग इन्वेंट्री (अनसोल्ड इन्वेंट्री) फाइनेंशियल ईयर 2027 तक बढ़कर 3.2-3.4 साल तक पहुँच सकती है, जो पहले तीन साल से कम थी। अप्रूवल की रुकावटें, खासकर बेंगलुरु जैसे शहरों में, दूर करना बहुत ज़रूरी होगा। हालांकि, प्रीमियम और लक्ज़री हाउसिंग मार्केट इस दौरान मजबूत बना हुआ है। अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 में नए लॉन्च का 38-40% हिस्सा इन सेगमेंट्स से आएगा, जो 2022 में सिर्फ 12% था। यह डेवलपर्स के लिए बेहतर रेवेन्यू और प्रॉफिट मार्जिन का मौका दे रहा है।
डेवलपर्स की फाइनेंशियल हेल्थ अच्छी
धीमी सेल्स ग्रोथ के बावजूद, डेवलपर्स की फाइनेंशियल हेल्थ अच्छी बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह लगातार हो रहा कलेक्शन है, जो कंस्ट्रक्शन के साथ तालमेल बिठा रहा है। इससे मजबूत कैश फ्लो जनरेट हो रहा है और डेवलपर्स बाहरी कर्ज पर निर्भरता कम कर पा रहे हैं। Crisil का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 में ऑपरेशंस से कैश फ्लो (CFO) 15-17% बढ़ सकता है, जिसकी वजह कलेक्शन में 22-24% की बढ़ोतरी होगी।
आगे के संभावित जोखिम
डेवलपर्स की क्रेडिट वर्थिनेस मजबूत रहने की उम्मीद है, जहाँ डेट-टू-कैश फ्लो रेशियो 2027 में 1.1-1.3 गुना के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। अगर ऊँची लॉन्चिंग के बीच मांग में उम्मीद से ज़्यादा गिरावट आती है, तो इन्वेंट्री का बड़ा स्टॉक जमा हो सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल मुद्दे महंगाई बढ़ा सकते हैं, जिससे खरीदारों का भरोसा और भी प्रभावित हो सकता है।