ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के लगातार ऊंचे बने रहने के कारण भारत का रियल एस्टेट मार्केट एक कठिन दौर से गुजर रहा है। प्रॉपर्टी की कीमतें और बिक्री में इजाफे का वो दौर अब धीमा पड़ता दिख रहा है, खासकर प्रीमियम सेगमेंट को छोड़कर।
प्रीमियम सेगमेंट की चमक, पर आम आदमी की पहुंच से दूर
जहां प्रीमियम और लग्जरी प्रॉपर्टीज ने पिछले 5 सालों में अच्छी ग्रोथ दिखाई है और 2025 में कुल बिक्री का लगभग 27% हिस्सा रहीं, वहीं आम आदमी के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। देश भर में औसत Price-to-Income रेशियो 6.6 (2020) से बढ़कर 7.5 (2024) हो गया है। डेवलपर्स ने मार्जिन बचाने के लिए प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस बढ़ाया है, जिससे अफोर्डेबल हाउसिंग का शेयर 40% से घटकर सिर्फ 15% रह गया है।
बढ़ती लागत ने डेवलपर्स के मार्जिन पर कसा शिकंजा
कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में भी लगातार इजाफा हो रहा है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि स्टील, एल्युमीनियम, कॉपर और लॉजिस्टिक्स महंगे होने से कुल बिल्डिंग खर्च में 3-5% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। लेबर कॉस्ट में भी 5-6% की तेजी आई है। यह लागत बढ़ोतरी सीधे तौर पर डेवलपर्स के मुनाफे को कम कर रही है, खासकर छोटे और मध्यम डेवलपर्स के लिए, जिससे प्रोजेक्ट में 3 से 6 महीने तक की देरी हो सकती है।
इकोनॉमिक हेडविंड्स से डिमांड पर असर
देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ भी थोड़ी धीमी पड़ती दिख रही है। 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.0% से 6.9% के बीच है। वहीं, महंगाई दर 4.0% से 4.7% रहने का अनुमान है, जो RBI के टारगेट के करीब या उससे ऊपर है। इन सबके चलते ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं। RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है, जिसका मतलब है कि ऊंची ब्याज दरें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। यह स्थिति, खासकर IT सेक्टर पर AI और ऑटोमेशन के असर के साथ मिलकर, डिमांड को कमजोर कर रही है, खासकर बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में।
मार्केट परफॉर्मेंस और FY27 का अनुमान
मार्केट की यह चिंता Nifty Realty इंडेक्स में भी दिख रही है, जो साल-दर-साल 15% गिर चुका है, जबकि Nifty 50 में 10% की गिरावट आई है। FY27 के लिए एनालिस्ट्स का अनुमान है कि बिक्री में ग्रोथ घटकर सिर्फ 5-7% रह जाएगी, जबकि प्री-सेल्स ग्रोथ 21% (FY26) से घटकर 6% (FY27) पर आ सकती है। कीमतें भी 3-5% की रफ्तार से ही बढ़ेंगी।
Affordability Crunch का बढ़ता बोझ
कुल मिलाकर, बढ़ती लागत और लगातार ऊंची हो रही EMI, घर खरीदारों के बजट पर भारी पड़ रही है। भले ही कुछ अनुमानों में 2026-28 तक हालात सुधरने की बात कही जा रही है, लेकिन फिलहाल डिमांड नाजुक बनी हुई है। यह स्थिति रियल एस्टेट सेक्टर में एक 'रीसेट फेज' ला सकती है, खासकर उन बड़े बिल्डरों के लिए जो फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर फोकस कर रहे हैं।