ग्लोबल चिंताओं ने सेंटीमेंट को झटका दिया, पर सेक्टर में दिखी मजबूती
Q1 2026 में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर का सेंटीमेंट इंडेक्स गिरकर नेगेटिव जोन में चला गया है। मार्केट के एक्सपर्ट्स के 'करंट कंडीशंस' स्कोर 60 से घटकर 49 हो गए, जबकि 'फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस' भी 61 से गिरकर 50 पर आ गए। यह दिखाता है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच मार्केट में एक तरह का विभाजन देखने को मिल रहा है।
ऑफिस स्पेस की बंपर डिमांड, घरों की कीमतें स्थिर
इस तिमाही में ऑफिस स्पेस की लीजिंग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। लगभग 20.7 से 21.9 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग हुई, जो पिछले साल की तुलना में 10-13% ज्यादा है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) ने अकेले 44% ऑफिस स्पेस लीज किया, और टेक व फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों से भी अच्छी डिमांड बनी हुई है।
इसके विपरीत, रेजिडेंशियल (आवासीय) मार्केट में बिक्री और नए लॉन्च धीमे पड़े हैं। आधे से ज्यादा इंडस्ट्री इनसाइडर्स को लगता है कि घरों की बिक्री कम होगी। फिर भी, घरों की कीमतें आश्चर्यजनक रूप से स्थिर बनी हुई हैं। 73% लोग उम्मीद कर रहे हैं कि कीमतें बढ़ेंगी या स्थिर रहेंगी। इसका मुख्य कारण हैं बढ़ती इनपुट कॉस्ट्स।
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से बढ़ी कंस्ट्रक्शन लागत
ग्लोबल टेंशन के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $105 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे फ्यूल, लॉजिस्टिक्स और साइट पर काम की लागत काफी बढ़ गई है। स्टील और सीमेंट के दाम भले ही स्थिर हों, लेकिन पेट्रोकेमिकल की लागत बढ़ने से PVC पाइप, पेंट और एडहेसिव जैसे सामान महंगे हो रहे हैं। अगर कच्चे तेल के दाम ऐसे ही ऊंचे बने रहे, तो कंस्ट्रक्शन की कुल लागत 10-12% तक बढ़ सकती है। यह बढ़ी हुई लागत रेजिडेंशियल सेक्टर के लिए एक प्राइस फ्लोर का काम कर रही है, जिससे मांग कम होने की उम्मीदों और स्थिर कीमतों के बीच एक गैप बन रहा है।
ऑफिस मार्केट में रिकॉर्ड लीजिंग, किराए में उछाल
ऑफिस मार्केट का प्रदर्शन शानदार रहा। Q1 2026 में रिकॉर्ड फर्स्ट-क्वार्टर लीजिंग एक्टिविटी देखी गई, जिसमें प्रमुख शहरों में 11.5 से 13.7 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग हुई। नई ग्रेड-ए ऑफिस सप्लाई में कमी (पिछले सात तिमाहियों में सबसे कम) और इस बढ़ती डिमांड ने खाली स्पेस को कम किया है और किराए बढ़ा दिए हैं। GCCs का ग्रोथ, IT/ITeS और BFSI से लगातार डिमांड ऑफिस सेगमेंट की सफलता को बढ़ावा दे रही है। फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस प्रोवाइडर्स भी अब कंपनियों के रियल एस्टेट प्लान का अहम हिस्सा बन गए हैं।
डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स का दबदबा, ऑफिस एसेट्स सबसे आगे
Q1 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर में इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट $5.1 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसमें $1.6 बिलियन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स से आए, जो पिछले साल से 25% ज्यादा है। कुल इनफ्लो में डोमेस्टिक कैपिटल का हिस्सा 75-81% रहा, जबकि ग्लोबल वोलेटिलिटी के चलते फॉरेन इन्वेस्टमेंट में कमी आई। ऑफिस एसेट्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहे, जिन्हें कुल निवेश का लगभग 50% मिला। रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) में भी $2 बिलियन का बड़ा निवेश हुआ, जो ग्रोइंग कैपिटल मार्केट्स का संकेत देता है।
ग्लोबल चिंताओं और मार्जिन प्रेशर से बढ़ी सावधानी
करंट सेंटीमेंट स्कोर (करंट कंडीशंस के लिए 49, फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस के लिए 50) में गिरावट बढ़ी हुई सावधानी का संकेत देती है। एक्सपर्ट्स इसे एक सामान्य मार्केट एडजस्टमेंट मान रहे हैं। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें डेवलपर्स के प्रॉफिट मार्जिन को दबा सकती हैं या कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं, जिससे मांग कम हो सकती है। सेंटीमेंट नॉर्थ और साउथ इंडिया में भी गिरा है, जबकि वेस्ट इंडिया ज्यादा मजबूत दिखा। ऑफिस मार्केट मजबूत होने के बावजूद, लीज रिन्यूअल और REITs के भारी ऑफिस फोकस को लेकर कुछ जोखिम बने हुए हैं।
भविष्य का आउटलुक
भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में सावधानी के साथ ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। ऑफिस मार्केट 2026 में स्थिर प्रदर्शन करेगा, प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज की डिमांड बनी रहेगी, और डेटा सेंटर्स व फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस जैसे एरिया में ग्रोथ जारी रहेगी। रेजिडेंशियल मार्केट अगले पांच से सात वर्षों में 13-15% की कंपाउंड एनुअल रेट से बढ़ने का अनुमान है। वर्तमान सेंटीमेंट डिप के बावजूद, डोमेस्टिक इकोनॉमिक फंडामेंटल्स एक मजबूत नींव प्रदान करते हैं। निफ्टी REITs & Realty इंडेक्स का प्राइस-टू-अर्निंग्स (PE) रेशियो लगभग 48.74 है, जो 7-साल के औसत के करीब है, जिससे बाजार उचित रूप से वैल्यूड दिखता है।
