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Indian Real Estate: विदेशी पैसा भागा, देसी पूंजी दौड़ी! Q1 में निवेश 74% उछला

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Real Estate: विदेशी पैसा भागा, देसी पूंजी दौड़ी! Q1 में निवेश 74% उछला
Overview

भारतीय रियल एस्टेट में इस तिमाही एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विदेशी निवेश में जहां **75%** की भारी गिरावट आई, वहीं डोमेस्टिक (घरेलू) निवेशकों ने बाजी मार ली। इसके चलते कुल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट (Institutional Investment) में **74%** का जोरदार उछाल आया है।

निवेश का बदला रुख: देसी पूंजी का दबदबा

भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखा गया है, जहां विदेशी निवेशकों के पीछे हटने के बावजूद डोमेस्टिक (घरेलू) कैपिटल ने कुल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट (Institutional Investment) को 74% बढ़ाकर $1.41 बिलियन तक पहुंचा दिया है। यह एक महत्वपूर्ण ट्रेंड है जो भारतीय रियल एस्टेट की आंतरिक मजबूती को दर्शाता है।

Q1 में डोमेस्टिक निवेशकों का जलवा

2026 की पहली तिमाही (Q1 2026) में भारतीय रियल एस्टेट में कुल $1.41 बिलियन का इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट आया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q1 2025) के $0.81 बिलियन के मुकाबले 74% ज्यादा है। हालांकि, यह पिछले क्वार्टर (Q4 2025) के $3.73 बिलियन से 62% कम था, जिसका मुख्य कारण पिछले क्वार्टर का बड़ा आधार था।

इस दौरान, विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 75% घटकर सिर्फ 13% रह गई, जबकि एक साल पहले यह 40% से ज्यादा थी। इसकी बड़ी वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और आर्थिक अनिश्चितताएं रही हैं। वहीं, डोमेस्टिक निवेशकों की एंट्री जबरदस्त रही। 2026 की पहली तिमाही में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 72% हो गई, जो Q4 2025 में सिर्फ 22% थी। इन घरेलू निवेशकों ने मार्केट में $1 बिलियन से ज्यादा का निवेश किया।

कमर्शियल प्रॉपर्टी की धूम

इस तिमाही में कमर्शियल रियल एस्टेट (Commercial Real Estate) सबसे आगे रहा। इसने कुल निवेश का करीब 80% यानी $1.1 बिलियन से ज्यादा आकर्षित किया। इस सेगमेंट में पिछले साल की तुलना में 266% की शानदार ग्रोथ देखी गई, हालांकि यह पिछले क्वार्टर से 51% कम था। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और अन्य बड़ी कंपनियों के विस्तार के कारण ऑफिस स्पेस की मांग बनी हुई है।

इसके उलट, रेजिडेंशियल रियल एस्टेट (Residential Real Estate) में निवेश 53% तिमाही-दर-तिमाही और 59% साल-दर-साल घटकर सिर्फ $0.2 बिलियन रह गया। इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेगमेंट में भी गिरावट आई, जहां सिर्फ $22 मिलियन का निवेश हुआ, जो कुल निवेश का सिर्फ 1% है।

APAC रीजन में भारत की मजबूत स्थिति

एशिया पैसिफिक (APAC) रीजन में भारतीय रियल एस्टेट ने एक महत्वपूर्ण ग्रोथ मार्केट के रूप में अपनी पहचान बनाई है। 2025 में APAC रीजन में कुल रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट $162 बिलियन रहा (जो 8% बढ़ा था)। वहीं, भारत में 2025 में इन्वेस्टमेंट 29% बढ़कर करीब $8.5 बिलियन तक पहुंच गया था।

Q1 2026 में तिमाही गिरावट के बावजूद, भारत का साल-दर-साल ग्रोथ रेट और डोमेस्टिक कैपिटल की बढ़ती हिस्सेदारी इसकी मजबूती दिखाती है। टोक्यो, सिंगापुर और सिडनी जैसे विकसित बाजार अपनी लिक्विडिटी (liquidity) के कारण पूंजी आकर्षित करते रहे हैं। वहीं, चीन सप्लाई की अधिकता से जूझ रहा है। भारत को एक चुनिंदा ग्रोथ स्टोरी के तौर पर देखा जा रहा है, जो मजबूत GDP परफॉरमेंस और लगातार हो रहे रेगुलेटरी सुधारों का फायदा उठा रहा है।

आर्थिक मजबूती दे रही सहारा

भारत की इकोनॉमी (economy) की बात करें तो 2026 में रियल GDP ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान है। महंगाई (inflation) भी ऐतिहासिक रूप से कम रही है, जो हाल के दिनों में 1.7% से 2.2% के बीच रही है। 2026 के लिए इसके 3.9% से 4% के आसपास रहने का अनुमान है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आसान मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) मिड-मार्केट हाउसिंग जैसे सेगमेंट्स को सपोर्ट कर रही है।

वैश्विक चुनौतियां बरकरार

Q1 2026 में इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट में आई यह भारी गिरावट, खासकर विदेशी निवेश में, दिखाती है कि कैपिटल फ्लो (capital flow) भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति कितना संवेदनशील है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व संकट जैसी घटनाएं कमोडिटी की कीमतों, माल ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम को प्रभावित कर रही हैं, जिसका असर डेवलपर्स के मार्जिन पर पड़ रहा है।

सेक्टर-विशिष्ट चुनौतियां और मार्जिन दबाव

कमर्शियल एसेट्स (commercial assets) भले ही कुल इन्वेस्टमेंट को सहारा दे रहे हों, लेकिन इस सेगमेंट में भी कैपिटल इनफ्लो में 51% की तिमाही गिरावट एक अस्थायी ठहराव का संकेत देती है। रेजिडेंशियल सेगमेंट में लगातार गिरावट खरीदारों की बदलती पसंद या अफोर्डेबिलिटी (affordability) के मुद्दों को दर्शाती है। स्टील और पेट्रोकेमिकल्स जैसी बढ़ती लागतों के चलते डेवलपर्स पर मार्जिन मैनेजमेंट का दबाव बढ़ रहा है।

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