India Real Estate AI Adoption: 91% कंपनियों ने अपनाया AI, पर इन जोखिमों पर रखें नज़र!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Real Estate AI Adoption: 91% कंपनियों ने अपनाया AI, पर इन जोखिमों पर रखें नज़र!

भारत का $650 बिलियन का रियल एस्टेट सेक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मार्केटिंग से आगे बढ़ाकर कंस्ट्रक्शन और फाइनेंस जैसे मुख्य कामों में भी इस्तेमाल कर रहा है। 2025 तक कॉर्पोरेट कंपनियों में AI का इस्तेमाल 91% तक पहुंच गया है। हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर ध्यान देना होगा, क्योंकि कई कंपनियां पुरानी टेक्नोलॉजी और स्किल गैप जैसी दिक्कतों से जूझ रही हैं, भले ही AI इंडस्ट्री की इकोनॉमिक वैल्यू में अरबों का इजाफा कर सकता है।

रियल एस्टेट में AI का बड़ा बदलाव

भारत के $650 बिलियन के रियल एस्टेट सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां पहले AI का इस्तेमाल सिर्फ वर्चुअल टूर या कस्टमर चैटबॉट तक सीमित था, वहीं अब बड़े कॉर्पोरेट डेवलपर्स इसे अपने बिज़नेस के मुख्य हिस्सों में इंटीग्रेट कर रहे हैं। इसमें कंस्ट्रक्शन मॉनिटरिंग, प्रोजेक्ट प्लानिंग से लेकर रिस्क की भविष्यवाणी करना भी शामिल है।

AI अपनाने में ज़बरदस्त उछाल

हालिया डेटा के अनुसार, रियल एस्टेट कंपनियों में AI-आधारित सॉल्यूशंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। 2023 में जहां यह 5% से भी कम था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 91% हो गया है। यह बदलाव इंस्टीटूशनल इन्वेस्टर्स की मांग के कारण हुआ है, जो पारदर्शिता और डेटा-आधारित फैसलों को प्राथमिकता देते हैं। 2026 की पहली तिमाही में ही, इस सेक्टर ने $1.7 बिलियन का इंस्टीटूशनल इन्वेस्टमेंट आकर्षित किया, जो एफिशिएंट और मॉडर्न ऑपरेशनल प्रैक्टिसेज के महत्व को दर्शाता है।

AI से कितनी बढ़ेगी कमाई?

आने वाले सात सालों में जनरेटिव AI से इस सेक्टर के ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में $14-17 बिलियन की बढ़ोतरी का अनुमान है। डेवलपर्स AI का उपयोग साइट इमेजेस का एनालिसिस करने, कैश फ्लो मैनेज करने और प्रोक्योरमेंट की जरूरतें बताने में कर रहे हैं, ताकि प्रोजेक्ट में देरी कम हो और प्रोडक्टिविटी बढ़े। उदाहरण के लिए, मशीन-लर्निंग मॉडल अब शेड्यूल ओवररन को पहले ही पहचान सकते हैं, जिससे प्रोजेक्ट मैनेजर्स समय रहते रिसोर्सेज को री-एलोकेट कर सकते हैं। यह बदलाव इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इंस्टीटूशनल इन्वेस्टर्स उन डेवलपर्स को तरजीह दे रहे हैं जो भरोसेमंद, डेटा-आधारित टाइमलाइन और बजट रिपोर्ट दे सकें।

असली चुनौती: इम्प्लीमेंटेशन गैप

हालांकि, कंपनियों द्वारा AI को अपनाने के आंकड़े इसके इम्प्लीमेंटेशन में मौजूद बड़ी खाई को छिपाते हैं। रिसर्च से पता चलता है कि लगभग 5% कंपनियां ही अपने मुख्य AI ऑब्जेक्टिव्स को हासिल कर पा रही हैं। कई डेवलपर्स गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जैसे मशीन-रीडेबल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, पुराने सिस्टम जो AI सॉफ्टवेयर के साथ काम नहीं करते, और इन नई टेक्नोलॉजीज को मैनेज करने के लिए स्किल्ड टैलेंट की कमी। निवेशकों के लिए, यह एक स्पष्ट विभाजन रेखा बनाता है: जिन कंपनियों ने अपने डेटा आर्किटेक्चर को सफलतापूर्वक मॉडर्नाइज किया है, उन्हें कॉम्पिटिटिव एडवांटेज मिलेगा, जबकि अन्य इन टूल्स को प्रभावी ढंग से इंटीग्रेट करने में संघर्ष कर सकते हैं, जिससे फेल हुए पायलेट प्रोजेक्ट्स पर कैपिटल एक्सपेंडिचर बर्बाद हो सकता है।

कमर्शियल ऑफिस स्पेस पर भी असर

एक और बड़ा सेक्टर रिस्क कमर्शियल ऑफिस स्पेस को लेकर है। जैसे-जैसे कंपनियां AI का उपयोग करके अपने वर्कफ़्लो को ऑटोमेट कर रही हैं, ऑफिस स्पेस की फिजिकल जरूरतें कम हो सकती हैं। इससे उन कमर्शियल रियल एस्टेट डेवलपर्स के रेंटल यील्ड और वेकेंसी रेट पर दबाव पड़ सकता है जो किरायेदारों की बदलती जरूरतों के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट नहीं कर रहे हैं।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

अंततः, रियल एस्टेट सेक्टर में AI का असली मूल्य इस बात से तय नहीं होगा कि कितने पायलट प्रोजेक्ट्स की घोषणा की गई है, बल्कि यह देखा जाएगा कि कौन से डेवलपर्स डेटा को सफलतापूर्वक कम लागत और तेज कंस्ट्रक्शन टाइमलाइन में बदल पाते हैं। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि क्या किसी कंपनी की AI स्ट्रेटेजी से सेल्स वेलोसिटी और मार्जिन प्रोटेक्शन में मापा जाने योग्य सुधार हो रहा है, या यह सिर्फ एक महंगा, अप्रमाणित प्रयोग बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.