भारत ने 2026 JLL ग्लोबल रियल एस्टेट ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स में पहली बार टॉप-30 में जगह बनाते हुए **26वां** स्थान हासिल किया है। RERA और डिजिटलीकरण जैसे सुधारों की बदौलत अब मार्केट में संस्थागत निवेश (Institutional Investment) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है।
भारतीय रियल एस्टेट मार्केट के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। 26वें पायदान पर पहुंचने के साथ ही भारत एशिया पैसिफिक रीजन में सबसे तेजी से सुधरने वाला मार्केट बन गया है। निवेशकों के लिए इसका सीधा मतलब है—बाजार की जटिलताओं में कमी और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स की ओर बढ़ते कदम।
रेगुलेटरी सुधारों से घटा जोखिम
भारत अब लीगल ट्रांसपेरेंसी के मामले में दुनिया में 19वें स्थान पर आ गया है। RERA के आने और डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स जैसे प्रोग्राम्स ने प्रॉपर्टी विवादों को काफी कम किया है। ट्रांजेक्शन ट्रांसपेरेंसी में हम ग्लोबल लेवल पर 10वें स्थान पर हैं, जिसके चलते साल 2025 में रियल एस्टेट सेक्टर में $10.5 बिलियन का प्राइवेट इक्विटी निवेश आया है।
REITs की बढ़ती लोकप्रियता
ट्रांसपेरेंसी बढ़ने का असर कमर्शियल प्रॉपर्टी में भी साफ दिख रहा है। वर्तमान में मौजूद ऑफिस इन्वेंट्री का 46% हिस्सा अब REITs के पास है। साल 2024 से 2026 के बीच ऑफिस REITs के स्टॉक में 58% की जबरदस्त ग्रोथ देखी गई है। यह रिटेल निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और लिक्विड माध्यम के रूप में उभरा है।
डेटा सेंटर्स और ESG का भविष्य
सस्टेनेबिलिटी के मामले में भी भारत की रैंकिंग सुधरकर 27वें नंबर पर आ गई है। आज भारत का 66% ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस ग्रीन-सर्टिफाइड है, जो साल 2020 में केवल 39% था। आने वाले समय में डेटा सेंटर का क्षेत्र बड़ा अवसर बनने वाला है, जहां कैपेसिटी 1.6 GW से बढ़कर 2029 तक 6 GW होने की उम्मीद है। बड़े टेक दिग्गजों ने इस सेक्टर में $50 बिलियन से अधिक के निवेश का कमिटमेंट किया है।
