कर्ज़ का ये सैलाब क्यों?
यह रिकॉर्ड डेट (Debt) जुटाना विस्तार और लागत को बेहतर बनाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जो बदलते रेगुलेटरी माहौल और सपोर्टिव मैक्रोइकॉनॉमिक सिचुएशन का फायदा उठा रहा है।
कर्ज़ का सैलाब और RBI की राह
भारत के रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) फाइनेंशियल ईयर 2025-26 को अब तक के सबसे बड़े डेट जुटाने वाले साल के तौर पर खत्म करने की ओर बढ़ रहे हैं। इन वाहनों ने अब तक कुल ₹37,742 करोड़ जुटाए हैं, जो कि FY18 के बाद सबसे ज्यादा है। यह रकम FY26 में इन वाहनों द्वारा उठाए गए कुल फंड का करीब 70% है।
इस बड़े पैमाने पर डेट जुटाने का कनेक्शन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के एक बड़े फैसले से भी है। RBI ने अब एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे बैंक सीधे REITs को लोन दे सकेंगे। इसका मकसद फंड जुटाने के रास्ते खोलना और लोन की लागत कम करना है। हालांकि, RBI ने इस पर कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जैसे कि बैंकों का किसी एक REIT और उससे जुड़ी संस्थाओं पर कुल एक्सपोजर (Exposure) उस REIT की एसेट वैल्यू का 49% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
Brookfield India Real Estate Trust जैसी संस्थाओं के लिए, इस कदम से Q4FY26 में लोन की औसत लागत 7.6% से घटकर 7.3% होने की उम्मीद है। रेपो रेट में कटौती और रीफाइनेंसिंग (Refinancing) इसका एक कारण है। Brookfield India REIT ने ₹2,000 करोड़ के सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड बॉन्ड (Sustainability-linked bonds) भी 7.06% के बढ़िया कूपन (Coupon) पर जारी किए हैं।
सेक्टर में दमदार परफॉर्मेंस, पर चुनौतियां भी
2025 में REITs और InvITs ने बाजार के अन्य बेंचमार्क को पीछे छोड़ दिया। भारत के लिस्टेड REITs ने 29.68% का रिटर्न दिया, वहीं Power InvITs ने 20.22% का अच्छा प्रदर्शन किया। यह Nifty50 TRI के 11.42% और G-Sec Index के 6.81% से काफी ज्यादा है। Mindspace REIT के शेयर 28.5% और Brookfield India REIT के यूनिट वैल्यू में 20% की बढ़ोतरी देखी गई।
माहौल भी सपोर्टिव है, RBI ने फरवरी 2026 में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है, वहीं इन्फ्लेशन (Inflation) स्थिर है और FY25/26 के लिए GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है। भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में अच्छी क्वालिटी वाले ऑफिस स्पेस की डिमांड बनी हुई है। लेकिन, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में थोड़ी नरमी दिख रही है, जो Q3FY26 में प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (Project Execution) की चुनौतियों के कारण साल-दर-साल 4% सिकुड़ गया।
जब कर्ज बढ़े, वैल्यूएशन पर सवाल
इतनी बड़ी रकम जुटाने और पॉजिटिव सेंटीमेंट के बावजूद, कुछ चिंताएं भी हैं। REITs और InvITs द्वारा भारी डेट जुटाने से उनके लिवरेज (Leverage) यानी कर्ज के स्तर पर चिंता बढ़ रही है। RBI की सीधी कर्ज देने की योजना से लोन की लागत तो कम हो सकती है, लेकिन लोन चुकाने के तरीके (Amortized repayment) और जमीन खरीदने के लिए फाइनेंसिंग पर रोक जैसे नए नियम, रेगुलेटर्स की सतर्कता को दर्शाते हैं।
यह तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब कुछ सेगमेंट्स में वैल्यूएशन (Valuation) काफी हाई दिख रहे हैं। जनवरी 2026 तक Brookfield India REIT का P/E रेशियो 70.47 के आसपास था, जो इंडस्ट्री एवरेज से दोगुना से भी ज्यादा है। वहीं, Embassy Office Parks REIT जैसी जगहों पर यील्ड (Yield) घटकर 6.1% रह गई है, जो बताता है कि शेयर की कीमत में बढ़ोतरी आय में वृद्धि से तेज है।
सेक्टर में मिले-जुले प्रदर्शन के संकेत भी हैं, रोड InvITs पिछड़ रहे हैं और Embassy Developments को Q3FY26 में पुरानी प्रोजेक्ट कॉस्ट के कारण नुकसान उठाना पड़ा। RBI के लोन स्ट्रक्चर पर प्रतिबंध, जैसे कि बुलेट या बलूनिंग प्रिंसिपल रीपेमेंट पर रोक, लंबी अवधि वाली एसेट क्लास में निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे का रास्ता: निवेश जारी, पर स्ट्रैटिजी पर फोकस
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि REITs और InvITs में संस्थागत निवेश (Institutional flows) जारी रहेगा। इन्हें पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन (Portfolio diversification) और स्थिर आय (Stable income generation) के लिए महत्वपूर्ण एसेट्स माना जा रहा है। भारतीय REIT मार्केट में कुल ग्रॉस एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹2,50,000 करोड़ से ऊपर चला गया है, जो कैपिटल मार्केट्स में इनके बढ़ते महत्व को दर्शाता है। भविष्य में ग्रोथ का मुख्य जरिया एसेट मोनेटाइजेशन (Asset monetisation) और हाई-क्वालिटी प्रॉपर्टीज की डिमांड होगी, साथ ही भारत की मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ भी सपोर्ट करेगी।