प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ी, किराए की डिमांड घटी: मार्केट का नया समीकरण
Q4 2025 के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में कैपिटल एप्रिसिएशन (Capital Appreciation) यानी प्रॉपर्टी की वैल्यू में बढ़ोतरी, रेंटल इनकम (Rental Income) यानी किराए से होने वाली कमाई पर भारी पड़ रही है। पूरे देश में प्रॉपर्टी की कीमतों में 2.2% का इजाफा हुआ, वहीं दूसरी ओर किराए की प्रॉपर्टी की मांग में तिमाही-दर-तिमाही 2.4% की कमी आई। यह अंतर बताता है कि निवेशक अब प्रॉपर्टी की कीमत में तेजी से पैसा बनने की उम्मीद कर रहे हैं, न कि किराए से नियमित आमदनी पर। इसी वजह से मार्केट में यील्ड कम्प्रेशन का असर साफ दिख रहा है, जहाँ किराए से मिलने वाली आमदनी प्रॉपर्टी की कुल वैल्यू के मुकाबले कम होती जा रही है।
कुछ शहरों में अच्छी यील्ड, पर राष्ट्रीय ट्रेंड चिंताजनक
हालांकि, चेन्नई जैसे कुछ शहरों में ग्रॉस रेंटल यील्ड (Gross Rental Yield) अब भी 4.16% के आसपास अच्छी बनी हुई है। इसके बाद अहमदाबाद (3.98%) और हैदराबाद (3.93%) जैसे शहर भी हैं, जबकि बेंगलुरु और कोलकाता 3.88% के आसपास हैं। लेकिन, राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो ट्रेंड यील्ड कम्प्रेशन की ओर इशारा कर रहा है। 2021 से 2024 के बीच, भारत के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की वैल्यू औसतन 128% तक बढ़ी, जबकि कई जगहों पर किराए की वैल्यू इससे काफी पीछे रही। यह ट्रेंड 2025 के आखिर तक भी जारी रहा, जहाँ बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें किराए की वृद्धि से आगे निकल गईं।
मार्केट एडजस्टमेंट या जोखिम?
जानकारों का मानना है कि कैपिटल एप्रिसिएशन और रेंटल ग्रोथ के बीच बढ़ता यह फासला मार्केट का एक एडजस्टमेंट है। किराए की मांग में कमी, प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के बावजूद, यह संकेत दे रही है कि मार्केट अब प्रॉपर्टी की वैल्यू के मुकाबले किराए से होने वाली आय के कम होने की सच्चाई को स्वीकार कर रहा है। इसका मतलब है कि प्रॉपर्टी में निवेश किए गए हर रुपये पर, किराए से सालाना रिटर्न कम होता जा रहा है। यह स्थिति उन निवेशकों के लिए थोड़ी चिंताजनक है जो किराए से नियमित आय चाहते हैं, क्योंकि उन्हें अब दूसरी प्रॉपर्टी या एसेट क्लास की ओर देखने की जरूरत पड़ सकती है।
प्रॉपर्टी मार्केट में धीमी पड़ती रफ्तार, बढ़ती चिंताएं
2025 में, टॉप शहरों में प्रॉपर्टी की औसत कीमतों में 8% की वृद्धि देखी गई, जो 2024 के 17% के मुकाबले धीमी है। इसके अलावा, 2025 में टॉप सात शहरों में कुल प्रॉपर्टी बिक्री की मात्रा 14% घट गई। यह गिरावट प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों, आईटी सेक्टर में छंटनी और अन्य आर्थिक कारणों से हुई है। बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख बाजारों में अनसोल्ड इन्वेंटरी (Unsold Inventory) यानी न बिकी हुई प्रॉपर्टी की संख्या बढ़ रही है। यह सब मिलकर मार्केट की स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं और कीमत में ठहराव या गिरावट की आशंका बढ़ा रहे हैं।