Commercial Real Estate: प्रीमियम मॉल्स में जगह की कमी, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची वैकेंसी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Commercial Real Estate: प्रीमियम मॉल्स में जगह की कमी, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची वैकेंसी

साल 2026 की पहली छमाही में भारत के ग्रेड-A मॉल्स में वैकेंसी रेट घटकर **5%** के स्तर पर आ गया है, जो पिछले **5 सालों** का सबसे निचला आंकड़ा है। इस कमी के चलते अब मॉल डेवलपर्स और REITs का रेंटल मार्केट पर दबदबा बढ़ गया है।

डेवलपर्स और REITs पर असर

वैकेंसी में आई यह गिरावट सीधे तौर पर बड़ी कंपनियों जैसे Phoenix Mills, Nexus Select Trust और DLF के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। जब बाजार में जगह की किल्लत होती है, तो मॉल मालिकों के पास लीज रिन्यूअल के दौरान किराया बढ़ाने की ताकत आ जाती है। यह स्थिति उन इन्वेस्टर्स के लिए महत्वपूर्ण है जो संगठित रिटेल सेक्टर (Organized Retail) की ग्रोथ पर नजर रखते हैं।

अलग-अलग शहरों की स्थिति

देश के हर हिस्से में तस्वीर अलग है। Kolkata का मार्केट फिलहाल सबसे टाइट है, जहाँ वैकेंसी केवल 1.3% है। इसके विपरीत, Delhi-NCR का परिदृश्य थोड़ा अलग है। यहाँ वैकेंसी 7% पर बनी हुई है, क्योंकि दूसरी तिमाही में करीब 0.90 मिलियन स्क्वायर फीट नई जगह बाजार में आई है, जिसे भरने में अभी समय लग रहा है।

टियर-2 शहरों की ओर बढ़ते कदम

बड़े शहरों में महंगी होती जगह और सीमित उपलब्धता के कारण अब रिटेल चेन अपनी स्ट्रैटेजी बदल रही हैं। साल 2020 से अब तक टियर-2 शहरों में लगभग 5.9 मिलियन स्क्वायर फीट रिटेल जगह जोड़ी गई है। यह बदलाव ब्रांड्स को लागत घटाने और बढ़ते कंज्यूमर डिमांड को भुनाने में मदद कर रहा है।

इन्वेस्टर्स को क्या देखना चाहिए?

आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या कम वैकेंसी का सीधा असर डेवलपर्स के प्रॉफिट मार्जिन में दिखता है। इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन कॉस्ट और डेट मैनेजमेंट पर भी निवेशकों को नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कंज्यूमर स्पेंडिंग में किसी भी तरह की सुस्ती का असर रेंटल ग्रोथ पर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.