ऑफिस मार्केट में दिख रहा है ज़ोरदार उछाल!
भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट (Commercial Real Estate) यानी ऑफिस मार्केट बंपर डिमांड के दौर से गुजर रहा है। इस वजह से दफ्तरों में खाली जगहों (vacancy) का स्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है, जो पिछले 11 तिमाहियों से लगातार गिरता हुआ 13.85% पर आ गया है। यह पिछले तिमाही के मुकाबले 48 basis points और पिछले साल के मुकाबले 191 basis points की गिरावट है। इस उछाल की मुख्य वजह कॉर्पोरेट कंपनियों का ऑफिस लौटना और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की तरफ से जबरदस्त लीजिंग है।
रिकॉर्ड तोड़ लीजिंग वॉल्यूम!
Q1 2026 में कुल लीजिंग वॉल्यूम (Gross Leasing Volume) 22 मिलियन स्क्वायर फीट (MSF) रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 13% ज्यादा है। इसमें GCCs का बड़ा हाथ रहा, जिन्होंने 8.7 MSF यानी कुल लीजिंग का करीब 40% हिस्सा लिया। GCCs की लीजिंग में 38% का सालाना उछाल देखा गया। इसके अलावा, IT-BPM सेक्टर ने 23% शेयर के साथ मांग का नेतृत्व किया, वहीं BFSI सेक्टर 21% और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स 18% के साथ पीछे रहे। बढ़ती मांग और सीमित नई सप्लाई के कारण, भारत भर में औसत किराए ₹100 प्रति वर्ग फुट प्रति माह के पार निकल गए हैं।
ग्लोबल तस्वीर और भारत की मजबूती
भारत की मजबूत इकोनॉमी (Economy) कमर्शियल रियल एस्टेट को सहारा दे रही है। वहीं, ग्लोबल लेवल पर देखें तो सिंगापुर का ऑफिस मार्केट भी इसी तरह की रिकॉर्ड लो वकेंसी और बढ़ते किराए का गवाह बना। हालांकि, हांगकांग का मार्केट थोड़ी ज्यादा वकेंसी के साथ संघर्ष कर रहा है। भारत की स्थिति इसलिए मजबूत है क्योंकि यहां मांग लगातार सप्लाई से ज्यादा है और इकोनॉमिक फोरकास्ट भी काफी पॉजिटिव हैं, जो 6.5% से 6.9% के बीच रहने का अनुमान है।
AI और ग्लोबल रिस्क: नई चुनौतियां
लेकिन इस शानदार तस्वीर के बीच कुछ बड़ी चुनौतियां भी मंडरा रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता इस्तेमाल भविष्य में ऑफिस स्पेस की मांग पर असर डाल सकता है। AI ऑटोमेशन और प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है, जिससे कंपनियों को कम जगह की जरूरत पड़ सकती है।
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट जैसे इलाकों में बढ़ती जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) ग्लोबल इकोनॉमी के लिए अनिश्चितता पैदा कर रही है। बढ़ती तेल की कीमतें भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) को बढ़ा सकती हैं और रुपये को कमजोर कर सकती हैं। सप्लाई चेन की दिक्कतें और माल ढुलाई की बढ़ती लागत कंपनियों के मुनाफे पर भारी पड़ सकती है।
AI के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत
GCCs द्वारा AI का तेजी से इस्तेमाल मौजूदा ऑफिस बिल्डिंग के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दबाव डाल रहा है। कई पुरानी बिल्डिंग्स AI-आधारित ऑपरेशन्स के लिए जरूरी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, सिस्टम परफॉर्मेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसी सुविधाओं से लैस नहीं हैं। इससे एक इंफ्रास्ट्रक्चर गैप पैदा हो रहा है, जो बिजनेस कंटिन्यूटी और प्रॉपर्टी वैल्यू को प्रभावित कर सकता है।
आगे का रास्ता: अनिश्चितता में अवसरों की तलाश
विश्लेषकों का अनुमान है कि ग्रेड A ऑफिस स्पेस की मांग बनी रहेगी और मार्च 2027 तक वकेंसी 12.0-12.5% तक गिर सकती है। GCCs और IT-BPM सेक्टर इस मांग को बढ़ाते रहेंगे। हालांकि, AI का बढ़ता प्रभाव और ग्लोबल अस्थिरता यह साफ करती है कि भविष्य का ऑफिस मार्केट ज्यादा फ्लेक्सिबल, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से लैस और 'स्मार्ट' इंफ्रास्ट्रक्चर वाला होगा। कंपनियों के लिए फ्लेक्सिबिलिटी और क्वालिटी अहम होगी, वहीं प्रॉपर्टी ओनर्स को वैल्यू बनाए रखने के लिए डिजिटल स्ट्रेंथ और सस्टेनेबिलिटी में निवेश करना होगा।