मेगा डील्स से ऑफिस लीजिंग को मिली रफ्तार
साल 2026 की पहली तिमाही (Q1 2026) में भारतीय ऑफिस लीजिंग मार्केट ने दमदार प्रदर्शन किया है। पूरे देश में कुल लीजिंग वॉल्यूम में 65% का भारी इजाफा हुआ है, जिसका श्रेय बड़े सौदों यानी मेगा डील्स (Mega Deals) को जाता है। इन बड़े सौदों ने 19.5 मिलियन वर्ग फुट (Million sq ft) से ज्यादा की लीजिंग दर्ज की, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 3% की बढ़ोतरी है। कंपनियाँ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट एक्सेस के लिए बड़े ऑफिस स्पेस को प्राथमिकता दे रही हैं, भले ही हाइब्रिड वर्क मॉडल (Hybrid Work Model) विकसित हो रहे हों।
बेंगलुरु में बड़े ऑफिस स्पेस की सबसे ज्यादा मांग
देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु (Bengaluru) बड़े ऑफिस स्पेस की मांग में सबसे आगे रहा। यहां 7 मिलियन वर्ग फुट से ज्यादा के ऐसे सौदे हुए, जो 100,000 वर्ग फुट से बड़े थे। यह बेंगलुरु की कुल लीजिंग वॉल्यूम का 77% रहा, जो दर्शाता है कि बड़ी कंपनियाँ यहां अपना बेस मजबूत कर रही हैं।
हैदराबाद और मुंबई में दिखी तेज ग्रोथ
प्रमुख बाजारों में हैदराबाद (Hyderabad) और मुंबई (Mumbai) ने बड़े ऑफिस सौदों में सबसे महत्वपूर्ण सालाना ग्रोथ (Year-on-year growth) दर्ज की। हैदराबाद में बड़े ऑफिस लीजिंग में 69% की भारी उछाल आई, जो 4.4 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गया। वहीं, मुंबई में यह आंकड़ा 81% बढ़कर 2.9 मिलियन वर्ग फुट हो गया। यह इन महानगरों में कॉर्पोरेट लीजिंग एक्टिविटी और क्वालिटी ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूत मांग का संकेत है।
मध्यम और छोटे लीज में भी हुआ इजाफा
सिर्फ बड़े सौदे ही नहीं, बल्कि मध्यम आकार के लीज (Mid-sized leases) भी फले-फूले हैं। 50,000 से 100,000 वर्ग फुट के बीच के लीज 27% बढ़कर 5.2 मिलियन वर्ग फुट हो गए। वहीं, 50,000 वर्ग फुट से कम के छोटे लीज में 4% की बढ़ोतरी हुई और यह भी 5.2 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गए। मुंबई इस सेगमेंट में भी आगे रहा, जो स्टार्ट-अप्स (Startups) और वित्तीय फर्मों (Financial Firms) की लगातार मांग को दर्शाता है।
भारत की ग्लोबल हब के तौर पर स्थिति मजबूत
ऑफिस लीजिंग में यह मजबूत प्रदर्शन भारत की ग्लोबल हब (Global Hub) के तौर पर स्थिति को और मजबूत करता है। खासकर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (Global Capability Centres - GCCs) और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (Multinational Corporations - MNCs) के लिए। लागत दक्षता (Cost efficiencies) और प्रतिभा (Talent) की उपलब्धता के आकर्षण के कारण ये कंपनियाँ भारत में अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रही हैं। यह रुझान भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट (Commercial Real Estate) सेक्टर में विश्वास और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।
