भारत में ऑफिस लीजिंग मार्केट ने रफ्तार पकड़ी है। जुलाई-सितंबर **2026** की तिमाही में कुल लीजिंग **9%** बढ़कर **18.7 मिलियन** स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है। जहां बेंगलुरु और दिल्ली-NCR में जबरदस्त मांग है, वहीं मुंबई और पुणे जैसे शहरों में सुस्ती निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भारत के सात प्रमुख शहरों में कमर्शियल ऑफिस लीजिंग ने 2026 की तीसरी तिमाही में 18.7 मिलियन स्क्वायर फीट का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 17.2 मिलियन स्क्वायर फीट था। यह डेटा साफ दिखाता है कि मार्केट में रिकवरी तो हो रही है, लेकिन इसकी रफ्तार हर शहर में एक जैसी नहीं है।
शहरों का 'परफॉर्मेंस कार्ड'
बेंगलुरु और दिल्ली-NCR इस बार के स्टार परफॉर्मर रहे हैं। बेंगलुरु में लीजिंग में 11% की वृद्धि देखी गई, जो इसे आईटी और बिजनेस सर्विसेज का हब बनाए हुए है। दिल्ली-NCR में मांग में जबरदस्त उछाल आया और यह 3.3 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। वहीं, हैदराबाद में 47% की बड़ी बढ़त दर्ज की गई।
इसके विपरीत, मुंबई, पुणे और चेन्नई जैसे पारंपरिक फाइनेंशियल हब में मांग 14% से 23% तक घट गई है।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
Embassy Office Parks REIT, Brookfield India REIT, Mindspace Business Parks REIT, DLF और Prestige Estates जैसी बड़ी कंपनियों का पोर्टफोलियो अलग-अलग शहरों में फैला है। किसी एक क्षेत्र में लीजिंग में गिरावट सीधे कंपनी की रेंटल इनकम (Rental Income) और ऑक्यूपेंसी रेट (Occupancy Rate) पर असर डाल सकती है, जो उनके शेयर प्राइस के लिए सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है।
आगे चलकर, निवेशकों को इन कंपनियों के आगामी रिजल्ट्स में रेंटल ग्रोथ और ऑक्यूपेंसी डेटा पर नजर रखनी चाहिए। अगर मुंबई या पुणे जैसे शहरों में नई सप्लाई और कम मांग का असंतुलन बना रहा, तो रेंटल दरों पर दबाव पड़ना तय है।
