भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर साल 2026 में नई ऊंचाइयों पर है। पहले 9 महीनों में ही **66.4 मिलियन** वर्ग फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया है, जिसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की बड़ी भूमिका रही है।
भारत के कमर्शियल ऑफिस मार्केट ने साल 2026 में इतिहास रच दिया है। चालू साल के पहले नौ महीनों में कुल स्पेस एब्जॉर्प्शन 66.4 मिलियन वर्ग फीट तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 8% की दमदार बढ़त दिखाता है। सिर्फ तीसरी तिमाही में ही करीब 21 मिलियन वर्ग फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया, जो पिछले साल के मुकाबले 6% ज्यादा है।
GCCs की रफ्तार
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ी ताकत 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCCs) बने हैं। कुल लीजिंग वॉल्यूम में इनका हिस्सा 42% रहा है, जो करीब 28 मिलियन वर्ग फीट बैठता है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर इन बड़ी कंपनियों की पहली पसंद बने हुए हैं, जो भारत के टैलेंट पूल पर ग्लोबल फर्म्स के भरोसे को दर्शाता है।
प्रीमियम और सस्टेनेबल स्पेस की मांग
tenants की पसंद अब बदल रही है। अब 'ग्रेड A+' ऑफिस स्पेस और ग्रीन-सर्टिफाइड बिल्डिंग्स की डिमांड में उछाल आया है। LEED या IGBC रेटिंग वाली इमारतों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका असर सप्लाई चेन पर भी दिखा है, जहां साल के पहले 9 महीनों में 51 मिलियन वर्ग फीट नई सप्लाई आई है, जो 2025 के मुकाबले 18% ज्यादा है।
क्या हैं जोखिम और ध्यान रखने वाली बातें?
निवेशकों को कुछ चुनौतियां भी ध्यान में रखनी चाहिए। ऑफिस लीजिंग मार्केट जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं और ब्याज दरों (Interest Rates) में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है। चूंकि इस ग्रोथ का बड़ा हिस्सा टेक और GCC सेक्टर से जुड़ा है, इसलिए ग्लोबल AI हायरिंग में किसी भी तरह की सुस्ती भविष्य के लिए चिंता का कारण बन सकती है। निवेशकों को अब रेंटल ग्रोथ और नए एसेट्स में ऑक्यूपेंसी रेट्स पर नजर रखनी चाहिए, खासकर उन REITs के मामले में जो कमर्शियल पोर्टफोलियो मैनेज करते हैं।
