Commercial Real Estate: ऑफिस स्पेस की जबरदस्त डिमांड, लीजिंग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

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AuthorAditya Rao|Published at:
Commercial Real Estate: ऑफिस स्पेस की जबरदस्त डिमांड, लीजिंग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

भारत में कमर्शियल ऑफिस लीजिंग ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। साल **2026** के शुरुआती नौ महीनों में ग्रॉस लीजिंग **64.6 मिलियन स्क्वायर फीट** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि, सप्लाई की कमी के कारण नेट एब्जॉर्प्शन में **20%** की गिरावट आई है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

डिमांड और सप्लाई का अंतर

भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार में एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। एक तरफ कंपनियों की ओर से ऑफिस स्पेस की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है, तो दूसरी तरफ रेडी-टू-मूव-इन ग्रेड-ए स्पेस की भारी किल्लत बनी हुई है। साल 2026 के पहले नौ महीनों में ग्रॉस लीजिंग तो 1% बढ़कर 64.6 मिलियन स्क्वायर फीट हो गई, लेकिन नेट एब्जॉर्प्शन यानी असल में इस्तेमाल हो रही जगह में 20% की गिरावट दर्ज की गई और यह 36.7 मिलियन स्क्वायर फीट पर सिमट गया।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का दबदबा

इस उछाल के पीछे मुख्य इंजन 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCC) हैं। ये इंटरनेशनल टेक और इनोवेशन हब भारत में अपने ऑपरेशन्स को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इन्हें बड़े और हाई-क्वालिटी ऑफिस स्पेस की तलाश रहती है, जिससे चुनिंदा प्राइम ऑफिस एसेट्स पर मांग का दबाव बना हुआ है। डेवलपर्स प्रोजेक्ट पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल सप्लाई और डिमांड के बीच एक बड़ा गैप (Bottleneck) साफ दिख रहा है।

शहरों का बदलता गणित

रियल एस्टेट के इस बदलते ट्रेंड में भौगोलिक बदलाव भी अहम है। मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और चेन्नई जैसे पारंपरिक हब में नेट लीजिंग घटी है, जबकि बेंगलुरु मजबूती से शीर्ष पर कायम है। वहीं, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों में सकारात्मक ग्रोथ देखी गई है। यह दर्शाता है कि अब बड़ी कंपनियां केवल पुराने बिजनेस डिस्ट्रिक्ट्स तक सीमित नहीं रह रही हैं।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

सप्लाई की कमी से मकान मालिकों (Landlords) की बार्गेनिंग पावर बढ़ गई है, जिससे रेंटल प्राइसेज में उछाल आ सकता है। हालांकि, इसका एक उल्टा असर भी है—कंपनियों के फैसले लेने की प्रक्रिया धीमी हो रही है। जानकारों का मानना है कि निवेशकों को अब प्रोजेक्ट पूरे होने की टाइमलाइन और वैकेंसी रेट्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि सप्लाई बढ़ने पर ही यह सेक्टर अपनी तेजी को लंबे समय तक बरकरार रख पाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.