भारत के कमर्शियल ऑफिस सेक्टर में साल 2026 के पहले 9 महीनों में जबरदस्त हलचल दिखी है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की मांग में **30%** के उछाल के चलते लीजिंग **61.06 मिलियन** वर्ग फीट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर इस समय अपने सबसे शानदार दौर से गुजर रहा है। साल 2026 के शुरुआती नौ महीनों में ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम 61.06 मिलियन वर्ग फीट के ऐतिहासिक स्तर को छू चुका है। इसके साथ ही नेट एब्जॉर्प्शन 41.96 मिलियन वर्ग फीट रहा है, जो यह साबित करता है कि कंपनियां फिजिकल ऑफिस स्पेस को लेकर अब भी काफी गंभीर हैं।
GCCs बने ग्रोथ के इंजन
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का है। इन सेंटर्स ने इस साल 26.2 मिलियन वर्ग फीट जगह लीज पर ली है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 30.6% ज्यादा है। कुल लीजिंग में GCCs की हिस्सेदारी अब लगभग 43% तक पहुंच गई है। मुंबई और दिल्ली-NCR जैसे प्रमुख मेट्रो शहरों में वैकेंसी रेट पिछले एक दशक के निचले स्तर पर आ गए हैं।
नई सप्लाई और निवेश का गणित
बढ़ती मांग को देखते हुए डेवलपर्स ने भी काम तेज कर दिया है। इस साल 43.7 मिलियन वर्ग फीट का नया ऑफिस स्पेस मार्केट में आया है, जो महामारी के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। हालांकि नई सप्लाई से वैकेंसी रेट मामूली रूप से बढ़कर 14.8% हो गया है, लेकिन यह पिछले साल के मुकाबले 90 बेसिस पॉइंट्स कम है, जो बताता है कि मार्केट नई सप्लाई को बखूबी सोख रहा है।
निवेशकों के लिए संकेत
Embassy Office Parks, Mindspace Business Parks और Brookfield India Real Estate Trust जैसे ऑफिस REITs पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मार्केट में अब 'प्रीमियम क्वालिटी' की मांग बढ़ रही है, जबकि पुरानी प्रॉपर्टीज को संघर्ष करना पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में रेंटल ग्रोथ, लीज रिन्यूअल रेट्स और REITs की यील्ड पर पैनी नजर रखने की जरूरत होगी।
