भारत के कमर्शियल ऑफिस मार्केट में 2026 की पहली छमाही में रिकॉर्ड **4.55 करोड़ वर्ग फुट** की लीजिंग दर्ज की गई है। इसमें मल्टीनेशनल कंपनियों, खासकर GCCs का बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने कुल लीजिंग वॉल्यूम का **43%** हिस्सा अपने नाम किया।
भारत के रियल एस्टेट सेक्टर का नया कीर्तिमान
भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर ने 2026 की पहली छमाही में एक नया मुकाम हासिल किया है। इस दौरान ऑफिस स्पेस की कुल लीजिंग 4.55 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गई। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट CBRE के आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 9.6% की बढ़ोतरी दर्शाता है। लीजिंग गतिविधियों में इस उछाल से यह साफ है कि मल्टीनेशनल कंपनियां भारत में अपनी फिजिकल प्रेजेंस बनाए रखने और उसे बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही हैं।
GCCs चला रहे हैं डिमांड का पहिया
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) इस मांग के पीछे मुख्य शक्ति बनकर उभरे हैं। ये सेंटर्स, जो ग्लोबल पेरेंट कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और बिजनेस सपोर्ट के ऑफशोर हब के रूप में काम करते हैं, इस अवधि में हुए सभी लीजिंग ट्रांजैक्शन्स का 43% रहे। पिछले साल की तुलना में विशेष रूप से GCCs से जुड़े सौदों में 30% की वृद्धि देखी गई है। ये कंपनियां बड़े ऑफिस स्पेस हासिल करने में काफी सक्रिय हैं, जैसा कि 100,000 वर्ग फुट से बड़े सभी सौदों में 50% से अधिक में GCCs की भागीदारी से पता चलता है।
कॉरपोरेट इंडिया के लिए रणनीतिक कारण
इस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि कंपनियां वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद भारत में दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दे रही हैं। इस विस्तार को कुशल प्रतिभाओं की बड़ी उपलब्धता और भारत द्वारा प्रदान किए जाने वाले ऑपरेशनल कॉस्ट के फायदों का समर्थन प्राप्त है। फॉर्च्यून 500 कंपनियां विशेष रूप से सक्रिय रही हैं, उन्होंने अकेले दूसरी तिमाही में 6.8 मिलियन वर्ग फुट जगह लीज पर ली, जो पिछले तीन महीनों की तुलना में 34% अधिक है। अनुमानों के अनुसार, देश में GCCs की संख्या मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 2,100 से अधिक हो सकती है।
बाजार की गतिशीलता और भविष्य का दृष्टिकोण
ऑफिस लीजिंग में वृद्धि को फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की बढ़ती भूमिका का भी समर्थन मिल रहा है, जो कंपनियों को तत्काल जरूरतों के आधार पर अपने ऑपरेशंस को स्केल करने की सुविधा प्रदान करते हैं। हालांकि वर्तमान गति सकारात्मक बनी हुई है, भविष्य में लीजिंग की रफ्तार वैश्विक कारोबारी आत्मविश्वास और डेवलपर्स की प्रमुख टेक कॉरिडोर में हाई-क्वालिटी, सस्टेनेबल ऑफिस एसेट्स देने की क्षमता पर निर्भर करेगी। निवेशक प्रमुख मेट्रोपॉलिटन ऑफिस मार्केट्स में वैकेंसी लेवल्स में बदलावों पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि डेवलपर्स इस लगातार मांग को पूरा करने के लिए नया सप्लाई बाजार में ला रहे हैं।
