साल 2026 की दूसरी तिमाही में भारत के ऑफिस रियल एस्टेट मार्केट ने इतिहास रच दिया है। इस दौरान रिकॉर्ड **24.6 मिलियन वर्ग फुट** जगह लीज़ पर दी गई। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस प्रोवाइडर्स और बैंकिंग सेक्टर से आई ज़बरदस्त डिमांड ने इस ग्रोथ को बढ़ावा दिया।
ऑफिस स्पेस लीज़िंग में नया कीर्तिमान
अप्रैल-जून 2026 की अवधि में, भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर ने अब तक की सबसे मजबूत तिमाही दर्ज की है। रियल एस्टेट फर्म CBRE के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान ऑफिस स्पेस की ग्रॉस लीज़िंग 24.6 मिलियन वर्ग फुट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस ज़बरदस्त उछाल के साथ ही मार्केट में 21 मिलियन वर्ग फुट नए कमर्शियल ऑफिस स्पेस भी आए, जो प्रमुख शहरों में कंपनियों के बड़े विस्तार का संकेत देते हैं।
डिमांड के मुख्य खिलाड़ी
दूसरी तिमाही में इस ग्रोथ का बड़ा श्रेय फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स को जाता है, जिन्होंने कुल लीज़िंग एक्टिविटी का 27% हिस्सा कवर किया। टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) फर्मों के साथ मिलकर इन तीन सेगमेंट्स ने तिमाही के 62% लीज़िंग को अंजाम दिया। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) इस डिमांड का एक अहम हिस्सा बने रहे, जिन्होंने कुल लीज़्ड एरिया का 42% यानी 10.3 मिलियन वर्ग फुट जगह ली, जो इस कैटेगरी के लिए एक रिकॉर्ड परफॉरमेंस है।
शहरों में प्रदर्शन
बड़े सौदे, यानी 200,000 वर्ग फुट से बड़े लीज़ एग्रीमेंट्स में पिछली तिमाही की तुलना में 57% की बढ़ोतरी हुई। बेंगलुरु इस एक्टिविटी का मुख्य केंद्र रहा, जिसने दूसरी तिमाही में कुल लीज़िंग का 27% हिस्सा अपने नाम किया। पुणे और दिल्ली-एनसीआर के साथ मिलकर इन तीन क्षेत्रों ने कुल एब्जॉर्प्शन का आधे से ज़्यादा हिस्सा कवर किया। 2026 की पहली छमाही में, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई का संयुक्त योगदान राष्ट्रीय लीज़िंग एक्टिविटी का लगभग 61% रहा, जो इन स्थापित बाज़ारों के प्रति स्पष्ट प्राथमिकता दिखाता है।
निवेशकों के लिए अहम बातें
हालांकि मार्केट में एब्जॉर्प्शन के आंकड़े मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन नए प्रोजेक्ट्स की संख्या में 91% की भारी बढ़ोतरी (क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर) कुल ऑफिस स्टॉक में तेजी से विस्तार का संकेत देती है। कमर्शियल रियल एस्टेट कंपनियों और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए, यह ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा कि क्या लीज़िंग की यह रफ़्तार नए सप्लाई के इस प्रवाह के साथ बनी रह पाएगी। सप्लाई और डिमांड के बीच किसी भी मिसमैच का लंबी अवधि में रेंटल ग्रोथ रेट पर असर पड़ सकता है।
इंडस्ट्री की उम्मीदों के मुताबिक, साल 2026 के बाकी हिस्से में हाई-क्वालिटी और सस्टेनेबल बिल्डिंग्स की डिमांड एक अहम मुद्दा बनी रहेगी। जैसे-जैसे कंपनियां अपनी ऑफिस की ज़रूरतों को और बेहतर ढंग से समझेंगी, डेवलपर्स की क्षमता कि वे अपने नए प्रोजेक्ट्स में हाई ऑक्यूपेंसी रेट बनाए रख सकें, यह सेक्टर की वित्तीय सेहत का अगला महत्वपूर्ण संकेतक होगा। बाजार के जानकार यह भी देखेंगे कि क्या GCCs और फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटर्स पर भारी निर्भरता लीज़िंग वॉल्यूम के लिए एक स्थिर आधार प्रदान करना जारी रखेगी।
