वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी, भारतीय ऑफिस मार्केट ने 2026 की पहली तिमाही में 21.5 मिलियन वर्ग फुट के रिकॉर्ड स्तर की लीजिंग दर्ज की है। यह पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 10.2% की बड़ी बढ़ोतरी है, जो मार्केट की मजबूती को दर्शाता है।
GCCs और फ्लेक्स स्पेस बने डिमांड के हीरो
इस बम्पर लीजिंग की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और फ्लेक्स स्पेस ऑपरेटर्स रहे। इन्होंने कुल लीजिंग का 45.5% और 25.9% हिस्सा कवर किया। GCCs ने अकेले 9.8 मिलियन वर्ग फुट की लीजिंग की, जो पिछले साल की तुलना में 43% ज्यादा है। ये सेंटर अब सिर्फ बैक-ऑफिस नहीं, बल्कि इनोवेशन और डिजिटल इंजीनियरिंग के हब बनते जा रहे हैं। वहीं, फ्लेक्स स्पेस प्रोवाइडर्स ने भी प्रमुख शहरों में 5.56 मिलियन वर्ग फुट की लीजिंग हासिल की।
टॉप शहर और घटती वैकन्सी दर
शहरों की बात करें तो बेंगलुरु ऑफिस लीजिंग में 24.8% की हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद मुंबई (19.5%) और हैदराबाद (16.8%) का नंबर आया। बेंगलुरु में GCCs ने कुल लीजिंग का 70% हिस्सा लिया, जबकि पुणे (54.8%) और दिल्ली NCR (32.9%) में फ्लेक्स ऑपरेटर्स हावी रहे। पूरे भारत में ऑफिस स्पेस की वैकन्सी दर घटकर 14.7% पर आ गई है, जो पिछले 5 सालों का सबसे निचला स्तर है। इसी तिमाही में नेट एब्जॉर्प्शन 13.7 मिलियन वर्ग फुट का नया रिकॉर्ड बना।
भारत का बढ़ता इनोवेशन हब स्टेटस
भविष्य की ओर देखें तो भारत 2024 और 2025 के बीच लगभग 200 नए GCCs का स्वागत करने के लिए तैयार है। अगले दो सालों में सालाना लीजिंग 100 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत लागत-बचत वाले स्थान से आगे बढ़कर एक ग्लोबल इनोवेशन सेंटर के रूप में उभर रहा है, जिसमें बेंगलुरु सबसे आगे है।
