जून तिमाही (Q1FY27) में भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती देखी गई है। जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण कॉर्पोरेट डील्स में देरी हुई और ग्रॉस एब्जॉर्प्शन घटकर **19.4 मिलियन स्क्वायर फीट** रह गया। हालांकि, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की मजबूत मांग ने सेक्टर को सहारा दिया है।
भारतीय ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर के लिए जून तिमाही (Q1FY27) उतार-चढ़ाव भरी रही है। आंकड़ों के अनुसार, ग्रॉस एब्जॉर्प्शन सालाना आधार पर 6% गिरकर 19.4 मिलियन स्क्वायर फीट पर आ गया है, जबकि नेट एब्जॉर्प्शन में 21% की तेज गिरावट देखी गई है और यह 9.9 मिलियन स्क्वायर फीट पर दर्ज हुआ है। जानकारों का मानना है कि वेस्ट एशिया में चल रहे जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण कंपनियों ने लॉन्ग-टर्म लीजिंग फैसलों को फिलहाल होल्ड पर रखा है।
मजबूती के संकेत और GCC का दबदबा
कमजोर आंकड़ों के बावजूद सेक्टर में स्थिरता के संकेत भी हैं। ऑफिस वैकेंसी रेट में सुधार हुआ है, जो पिछले साल के 13.2% से घटकर 11.3% पर आ गई है। इसका मतलब है कि मार्केट में अच्छी क्वालिटी वाली जगहों की मांग अब भी बनी हुई है। सेक्टर को सबसे बड़ा सहारा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) से मिल रहा है, जिनकी कुल लीजिंग गतिविधि में 48% हिस्सेदारी रही।
REITs पर असर और टैक्स पॉलिसी
Embassy Office Parks REIT जैसे प्लेयर्स ने इस माहौल में भी शानदार प्रदर्शन किया है, जिसकी रेवेन्यू और नेट ऑपरेटिंग इनकम में 17% की सालाना बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, Mindspace Business Parks REIT और Brookfield India Real Estate Trust जैसे बड़े नाम भी अपनी ऑक्यूपेंसी को 90% के ऊपर बनाए रखने में सफल रहे हैं। निवेशकों की नजर अब 'Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026' पर है, जिसके तहत स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) पर टैक्स को 35% से घटाकर 29% करने का प्रस्ताव है। अगर यह लागू होता है, तो REIT निवेशकों की कमाई में बड़ा इजाफा हो सकता है।
आगे के जोखिम
भले ही सेक्टर स्थिर हो, लेकिन बढ़ती कंस्ट्रक्शन कॉस्ट और सप्लाई चेन की दिक्कतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसके साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में ऑफिस स्पेस की जरूरत पर क्या असर पड़ेगा, यह भी देखने वाली बात होगी।
