India Office Leasing: Q2 में **14.5%** गिरी लीजिंग, पर खाली जगह (Vacancy) **13.7%** पर, GCCs ने संभाला बाजार

REAL-ESTATE
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
India Office Leasing: Q2 में **14.5%** गिरी लीजिंग, पर खाली जगह (Vacancy) **13.7%** पर, GCCs ने संभाला बाजार

भारत के टॉप 8 शहरों में Q2 2026 में ऑफिस स्पेस की लीजिंग **14.5%** घटकर **1.16 करोड़** वर्ग फुट रह गई। हालांकि, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की डिमांड बनी हुई है, और खाली जगह (Vacancy) दरें **13.7%** के पोस्ट-पैंडेमिक निचले स्तर पर आ गई हैं।

क्या हुआ?

साल 2026 की दूसरी तिमाही (Q2) में, भारत के प्रमुख आठ शहरों में ऑफिस स्पेस की लीजिंग पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 14.5% गिर गई। इस तिमाही में कुल 1.16 करोड़ वर्ग फुट की लीजिंग दर्ज की गई। यह कमी ऐसे समय में आई है जब कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में उपलब्ध जगह टाइट हो रही है, और वैकंसी दरें (Vacancy Rates) 13.7% तक गिर गई हैं, जो महामारी की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर है।

GCCs ने संभाला बाजार

भले ही कुल लीजिंग के आंकड़े में गिरावट दिखी हो, लेकिन ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) से आने वाली डिमांड कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा सहारा बनी हुई है। 2026 की पहली छमाही में GCCs ने 1.65 करोड़ वर्ग फुट जगह लीज पर ली, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 38% की बढ़ोतरी है। अकेले दूसरी तिमाही में, इन सेंटर्स ने लगभग 80 लाख वर्ग फुट जगह ली। बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली NCR और मुंबई जैसे प्रमुख टेक और बिजनेस हब में इन सेंटर्स का विस्तार, कमर्शियल प्रॉपर्टी मालिकों और डेवलपर्स के लिए रेंटल इनकम को स्थिरता प्रदान कर रहा है।

बढ़ते किराए और सप्लाई की स्थिति

तिमाही के आधार पर लीजिंग वॉल्यूम में गिरावट के बावजूद, किराए में लगातार बढ़ोतरी जारी है। चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे प्रमुख बाजारों में तिमाही-दर-तिमाही किराए में 2% से 3% की ग्रोथ दर्ज की गई है। यह ट्रेंड बताता है कि भले ही वैश्विक आर्थिक कारकों के कारण नई लीजिंग के फैसले लेने में अधिक समय लग रहा हो, लेकिन प्राइम लोकेशंस में क्वालिटी ऑफिस स्पेस की डिमांड मजबूत बनी हुई है। इसके अलावा, फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेगमेंट में भी काफी रुचि देखी गई है, जहां ऑपरेटर्स ने 2026 की पहली छमाही में 84 लाख वर्ग फुट जगह लीज पर ली, जो पिछले वर्ष की तुलना में 55% की छलांग है।

कमर्शियल रियल एस्टेट प्लेयर्स पर असर

लिस्टेड कमर्शियल रियल एस्टेट फर्मों और ऑफिस-फोकस्ड REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) में निवेशकों के लिए, यह डेटा एक मिश्रित लेकिन लचीली तस्वीर पेश करता है। लीजिंग वॉल्यूम में गिरावट कभी-कभी ऑक्यूपेंसी ग्रोथ में मंदी का संकेत दे सकती है; हालांकि, वैकंसी दरों में आई समकालिक गिरावट यह दर्शाती है कि मौजूदा सप्लाई को प्रभावी ढंग से अवशोषित किया जा रहा है। GCCs द्वारा पसंद किए जाने वाले ग्रेड A ऑफिस स्पेस जैसे उच्च-मूल्य वाले प्रोडक्ट्स की ओर रुझान, कंपनियों को बेहतर मूल्य निर्धारण शक्ति बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, निवेशकों को इस बात से अवगत रहना चाहिए कि लगातार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता लीजिंग गतिविधि में तिमाही उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है, जो संभावित रूप से नए ऑफिस प्रोजेक्ट्स के भरने की गति को प्रभावित कर सकती है।

आगे क्या देखें?

कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर को ट्रैक करने वाले निवेशकों को प्रमुख लिस्टेड डेवलपर्स की तिमाही लीज-अप दरों (lease-up rates) पर नजर रखनी चाहिए। भविष्य का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स से मजबूत ग्रोथ ट्रेंड अन्य क्षेत्रों के संभावित सतर्क दृष्टिकोण को संतुलित कर पाता है। आने वाली तिमाहियों में सेक्टर के स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए प्रमुख माइक्रो-मार्केट्स में रेंटल ग्रोथ ट्रेंड्स और कमर्शियल पोर्टफोलियो में ऑक्यूपेंसी लेवल्स की निगरानी करना आवश्यक होगा।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.