India Office Leasing: रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन! AI का डर नहीं, 'क्वालिटी' स्पेस की कमी बनी वजह

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Office Leasing: रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन! AI का डर नहीं, 'क्वालिटी' स्पेस की कमी बनी वजह
Overview

भारत के ऑफिस रियल एस्टेट मार्केट ने **2025** में **8.64 करोड़ वर्ग फुट (86.4 million sq ft)** के रिकॉर्ड लीजिंग वॉल्यूम के साथ कमाल कर दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के डर के बावजूद, बाजार मजबूत बना हुआ है, जिसका मुख्य कारण प्रीमियम ग्रेड ए (Grade A) स्पेसेस की कमी और देश के अनुकूल डेमोग्राफिक्स (Demographics) हैं।

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AI के डर को पछाड़ते हुए रिकॉर्ड लीजिंग

भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर ने 2025 में 8.64 करोड़ वर्ग फुट के ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम के साथ एक नया रिकॉर्ड कायम किया है, जो पिछले साल की तुलना में 20% अधिक है। यह मजबूत प्रदर्शन दर्शाता है कि मार्केट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव से ज्यादा चिंतित नहीं है। ब्रुकफील्ड (Brookfield) के रियल एस्टेट के मैनेजिंग डायरेक्टर, Ashank Kothari, का कहना है कि अगर AI एक बड़ी चुनौती होती, तो इसके प्रभाव अब तक दिखने लगते।

दुनिया भर में AI से नौकरियां जाने और कामों के ऑटोमेशन (Automation) पर चर्चा के बावजूद, भारत के ऑफिस मार्केट में हाई-क्वालिटी स्पेसेस की मांग और किराए में जबरदस्त उछाल देखा गया है।

प्राइम स्पेस की कमी ने बढ़ाई मांग

भारतीय ऑफिस मार्केट में AI के सीमित तत्काल प्रभाव का एक बड़ा कारण प्रीमियम ग्रेड ए (Grade A) स्पेसेस की लगातार कमी है। भारत में कुल 1 अरब वर्ग फुट (1 billion sq ft) ऑफिस स्पेस है, जिसमें से लगभग 70% पुराना माना जाता है। इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के स्वामित्व वाले और ग्लोबल टेनेंट स्टैंडर्ड्स को पूरा करने वाले प्राइम ग्रेड ए ऑफिस काफी कम हैं। यही कमी 'फ्लाइट-टू-क्वालिटी' (Flight-to-Quality) को बढ़ावा दे रही है, जिससे आधुनिक और प्रीमियम स्पेसेस की मांग सप्लाई से कहीं ज्यादा हो गई है, और प्रमुख मार्केटों में किराए में वृद्धि देखी जा रही है।

बेंगलुरु मार्केट में सबसे आगे रहा, जहां 2025 में 2.87 करोड़ वर्ग फुट (28.7 million sq ft) की लीजिंग हुई। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) प्रमुख ऑक्यूपायर्स रहे, जिन्होंने कुल लीजिंग का 38% हिस्सा लिया। हैदराबाद, दिल्ली एनसीआर, पुणे और चेन्नई ने भी महत्वपूर्ण लीजिंग बेंचमार्क को पार किया।

डेमोग्राफिक्स और अर्बनाइजेशन से विकास को गति

भारत की अनुकूल डेमोग्राफिक्स और तेजी से हो रहे शहरीकरण (Urbanization) के कारण मांग को और बढ़ावा मिल रहा है। अगले 25 वर्षों में करीब 35 करोड़ (350 million) लोग शहरों की ओर पलायन करने की उम्मीद है, जिससे कमर्शियल स्पेसेस, हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग लगातार बनी रहेगी।

2025 के 8.64 करोड़ वर्ग फुट के लीजिंग वॉल्यूम से पता चलता है कि मार्केट एक मजबूत ग्रोथ ट्रैजेक्टरी पर है। 2024 में लगभग 8.9 करोड़ वर्ग फुट लीज हुए थे। BFSI सेक्टर कुल लीजिंग का 23% हिस्सा लेकर एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बना रहा, साथ ही फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स ने 9% की हिस्सेदारी ली। यह विविध मांग, सीमित नई ग्रेड ए सप्लाई के साथ मिलकर, ग्रेड ए स्टॉक के लिए वेकेंसी रेट्स (Vacancy Rates) को 2025 के अंत तक लगभग 14.4% तक टाइट कर दिया है।

AI का संभावित भविष्य प्रभाव और जोखिम

हालांकि भारतीय ऑफिस डिमांड पर AI का तत्काल प्रभाव नगण्य लग रहा है, वैश्विक परिप्रेक्ष्य भविष्य में संभावित व्यवधानों की ओर इशारा करता है। जनरेटिव AI को देखते हुए कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में ऑफिस सबसे अधिक जोखिम में हैं, जिसके 2032 तक महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की उम्मीद है। AI एडमिनिस्ट्रेटिव रोल्स में नौकरियों को विस्थापित कर सकता है, कामों को ऑटोमेट करके और इंसानी क्षमताओं को बढ़ाकर, जिससे प्रति कर्मचारी ऑफिस स्पेस की जरूरतें कम हो सकती हैं।

भारत का मार्केट वर्तमान में अर्बनाइजेशन और डेमोग्राफिक ग्रोथ जैसे मजबूत फंडामेंटल डिमांड ड्राइवर्स द्वारा समर्थित है, लेकिन भविष्य में AI से प्रोडक्टिविटी गेन्स स्पेस की जरूरतों को बदल सकते हैं। इसके अलावा, जहां प्राइम ग्रेड ए एसेट्स 'फ्लाइट-टू-क्वालिटी' से लाभान्वित हो रहे हैं, वहीं पुरानी इमारतों को अप्रचलित होने का खतरा है, जिससे अलग-अलग जोखिम प्रोफाइल वाले विभाजित मार्केट का निर्माण होगा।

GCCs और IT सेक्टर (जिनकी लीजिंग हिस्सेदारी घटकर लगभग 30% रह गई) जैसे विशिष्ट ऑक्यूपायर सेगमेंट्स पर निर्भरता जोखिम भरा हो सकता है, यदि ये सेक्टर्स अप्रत्याशित चुनौतियों या तकनीकी प्रगति के कारण अपने ऑपरेशनल मॉडल्स में बड़े बदलाव का सामना करते हैं।

भारतीय ऑफिस मार्केट का भविष्य का दृष्टिकोण

इंडस्ट्री रिपोर्ट्स भारत के ऑफिस मार्केट के लिए निरंतर मजबूती का अनुमान लगा रही हैं, जिसमें निकट भविष्य में वार्षिक लीजिंग 8-9 करोड़ वर्ग फुट के मजबूत स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। सप्लाई की तुलना में मांग जारी रहने से मार्च 2027 तक वेकेंसी रेट्स 12.0-12.5% तक गिरने की उम्मीद है।

किराए में वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है, खासकर प्राइम लोकेशंस में ESG-कंप्लायंट ग्रेड ए एसेट्स के लिए। हालांकि, नौकरियों और स्पेस यूटिलाइजेशन पर AI के दीर्घकालिक प्रभाव के लिए इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और डेवलपर्स द्वारा निरंतर निगरानी की आवश्यकता होगी। स्थायी मांग और सीमित सप्लाई पाइपलाइन के कारण वर्तमान मार्केट डायनामिक्स ग्रेड ए एसेट्स के लिए अनुकूल बने हुए हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.