भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार एक बड़े मील के पत्थर तक पहुंच गया है। ग्रेड ए (Grade A) ऑफिस स्पेस **1 बिलियन स्क्वायर फीट** के पार निकल गया है। एआई (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद कंपनियों का प्रीमियम ऑफिस के प्रति झुकाव कम नहीं हुआ है, जो REITs और डेवलपर्स के लिए अच्छे संकेत हैं।
एआई का खौफ बेअसर, ऑफिस की मांग बरकरार
आशंका जताई जा रही थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने के बाद कंपनियां अपने दफ्तरों को सिकोड़ लेंगी, लेकिन हकीकत इसके उलट है। बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 93% कंपनियां किसी न किसी रूप में एआई अपना रही हैं, लेकिन लगभग 57% फर्मों ने साफ कहा है कि उनके लीजिंग प्लान में कोई बदलाव नहीं आया है।
'फ्लाइट-टू-क्वालिटी' का दौर
कंपनियां अब पुरानी जगहों को छोड़कर प्रीमियम और आधुनिक सुविधाओं वाले ऑफिस की ओर भाग रही हैं। यह ट्रेंड Embassy Office Parks, Mindspace Business Parks और Brookfield India REIT जैसे बड़े नामों के लिए काफी पॉजिटिव है, क्योंकि ये कंपनियां हाई-क्वालिटी एसेट्स मैनेज करती हैं।
GCC की सबसे बड़ी भूमिका
इस मांग के पीछे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) मुख्य ड्राइवर बने हुए हैं। 2026 की पहली छमाही में नए ऑफिस स्पेस की कुल मांग का 42% से 43% हिस्सा अकेले इन्हीं सेंटर्स ने लिया है। इतना ही नहीं, करीब 77% कॉर्पोरेट ऑक्यूपायर्स अगले 2 सालों में अपना इंडिया पोर्टफोलियो बढ़ाने की तैयारी में हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि बाजार में अभी चमक है, लेकिन लंबी अवधि के रिस्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले 12 से 24 महीनों में एआई-ड्रिवन एफिशिएंसी लीजिंग फैसलों को प्रभावित कर सकती है। यदि कंपनियां एआई के जरिए ऑपरेशन को स्ट्रीमलाइन कर लेती हैं, तो भविष्य में ऑफिस स्पेस की जरूरत के पैटर्न में बदलाव आ सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे टॉप-टियर शहरों में रेंटल ग्रोथ और GCC की एक्सपेंशन योजनाओं पर पैनी नजर रखें।
