India Logistics Leasing: 2026 की पहली छमाही में रिकॉर्ड **3.62 करोड़ वर्ग फुट** की लीजिंग

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Logistics Leasing: 2026 की पहली छमाही में रिकॉर्ड **3.62 करोड़ वर्ग फुट** की लीजिंग

2026 की पहली छमाही में भारत के लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट मार्केट में रिकॉर्ड **3.62 करोड़ वर्ग फुट** (MSF) की लीजिंग हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि से **18%** ज्यादा है। दिल्ली-NCR **87 लाख वर्ग फुट** के साथ सबसे आगे रहा। हालांकि, लीजिंग वॉल्यूम मजबूत है, लेकिन निवेशकों को शहरों में बढ़ती सप्लाई पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में खाली पड़ी जगहों (vacancy rates) और किराए की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

2026 की पहली छमाही (H1 2026) में भारत के लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट सेक्टर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। देश के शीर्ष आठ शहरों में कुल लीजिंग 3.62 करोड़ वर्ग फुट (MSF) तक पहुंच गई। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 18% की वृद्धि दर्शाता है, जो देश की बढ़ती औद्योगिक गतिविधि को उजागर करता है। दिल्ली-NCR इस कुल लीजिंग में 87 लाख वर्ग फुट का योगदान देकर देश का प्रमुख हब बनकर उभरा है। यह 69% की सालाना वृद्धि राष्ट्रीय सप्लाई चेन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में इसकी स्थिति की पुष्टि करती है।

मांग के मुख्य कारक: 3PL और मैन्युफैक्चरिंग

लीजिंग में आई इस उछाल का नेतृत्व मुख्य रूप से दो सेक्टर कर रहे हैं: थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) प्रोवाइडर्स और मैन्युफैक्चरिंग। 3PL फर्में - जो अन्य व्यवसायों की ओर से परिवहन, भंडारण और इन्वेंट्री का प्रबंधन करती हैं - स्पेस की सबसे बड़ी उपभोक्ता बनी हुई हैं, जिनकी कुल मांग में 34% की हिस्सेदारी है। इसके बाद इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग फर्मों का नंबर आता है, जिनका लीजिंग वॉल्यूम में 28% योगदान रहा। ये दोनों सेगमेंट मिलकर बाजार की 60% से अधिक गतिविधि का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो घरेलू वितरण और निर्यात दोनों के संचालन का समर्थन करने के लिए आधुनिक वेयरहाउस सुविधाओं पर मजबूत निर्भरता का संकेत देता है।

ऑटोमोटिव सेक्टर और EV ग्रोथ

2026 की पहली छमाही (H1 2026) के सबसे महत्वपूर्ण रुझानों में से एक ऑटोमोटिव सेक्टर का तेजी से विस्तार रहा। ऑटोमोटिव कंपनियों द्वारा लीजिंग गतिविधि 2025 की पहली छमाही (H1 2025) की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई। इस वृद्धि का एक प्रमुख कारण इलेक्ट्रिक वाहन (EV) वैल्यू चेन का चल रहा विस्तार है, जिसके लिए बैटरी असेंबली और वाहन निर्माण हेतु विशेष औद्योगिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। इस सेक्टर ने साल की पहली छमाही में कुल मांग का 13% हिस्सा हासिल किया, जो भारत में वाहन विद्युतीकरण की व्यापक दिशा को दर्शाता है।

जोखिम और मार्केट मॉनिटरेबल्स

हालांकि रिकॉर्ड लीजिंग संख्या मजबूत मांग का संकेत देती है, लेकिन लॉजिस्टिक्स रियल एस्टेट मार्केट चुनौतियों से रहित नहीं है। कई माइक्रो-मार्केट में, नए निर्माण - या नई सप्लाई - की गति मांग से अधिक होने लगी है। यह असंतुलन खाली पड़ी जगहों (vacancy rates) में वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे मकान मालिकों के लिए किराए बढ़ाना मुश्किल हो जाएगा।

इसके अलावा, लीजिंग गतिविधि अधिक होने के बावजूद, संस्थागत निवेश सतर्क बना हुआ है। वेयरहाउसिंग और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट वर्तमान में भारत में कुल रियल एस्टेट संस्थागत निवेश का केवल एक छोटा सा हिस्सा (लगभग 1%) है। यह बताता है कि जहां डेवलपर सक्रिय रूप से निर्माण कर रहे हैं, वहीं बड़े पैमाने पर वित्तीय समर्थक अभी भी इस सेगमेंट में दीर्घकालिक रिटर्न का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रहे हैं। इस सेक्टर में निवेश करने वालों को प्रमुख हब में नई परियोजनाओं की पाइपलाइन और खाली पड़ी जगहों के स्तर पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये निर्धारित करेंगे कि वर्तमान किराये की वृद्धि टिकाऊ रहेगी या दबाव का सामना करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.