India Industrial Leasing: रिकॉर्ड 3.62 करोड़ वर्ग फुट की लीजिंग, ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की धूम

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Industrial Leasing: रिकॉर्ड 3.62 करोड़ वर्ग फुट की लीजिंग, ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की धूम

साल 2026 की पहली छमाही में भारत के लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट में रिकॉर्ड **18%** की ग्रोथ दर्ज की गई है। कुल लीजिंग **3.62 करोड़ वर्ग फुट** तक पहुंच गई है। मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर से आई जबरदस्त मांग ने इस वृद्धि को बढ़ावा दिया है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विस्तार का संकेत है।

मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर ने भरी उड़ान

2026 की पहली छमाही में भारतीय लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट मार्केट ने अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया है। जनवरी से जून के बीच कुल लीजिंग 3.62 करोड़ वर्ग फुट रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 18% ज्यादा है। यह दिखाता है कि कंपनियां देश के भीतर अपने मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन बेस को बढ़ाने में लगातार दिलचस्पी ले रही हैं।

इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा इंडस्ट्रियल एक्टिविटी में आई 36% की सालाना बढ़ोतरी से आया, जिसने कुल 1.2 करोड़ वर्ग फुट लीजिंग हासिल की। ऑटोमोटिव सेक्टर इस मामले में सबसे आगे रहा, जिसने अपनी लीजिंग 4.8 करोड़ वर्ग फुट तक दोगुनी कर ली। इलेक्ट्रिक व्हीकल सप्लाई चेन में चल रहे निवेश और मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार से यह ट्रेंड जुड़ा हुआ है। थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) प्रोवाइडर्स भी पीछे नहीं रहे, जिन्होंने 1.22 करोड़ वर्ग फुट लीज पर ली, जो पिछले साल के मुकाबले 64% का उछाल है। इससे साफ है कि कंपनियां एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए अपने सप्लाई चेन के काम को स्पेशलाइज्ड ऑपरेटर्स को आउटसोर्स कर रही हैं।

प्रमुख शहरों में लीजिंग का हाल

भारत के प्रमुख शहरों में प्रदर्शन अलग-अलग रहा। दिल्ली-NCR सबसे बड़ा मार्केट बनकर उभरा, जहां 69% की भारी बढ़ोतरी के साथ 87 लाख वर्ग फुट की लीजिंग हुई। चेन्नई और पुणे में भी ग्रोथ अच्छी रही, लीजिंग वॉल्यूम क्रमशः 39% और 32% बढ़ा। वहीं, मुंबई और बेंगलुरु में एक्टिविटी स्थिर बनी रही। इसके विपरीत, हैदराबाद एकमात्र प्रमुख शहर रहा जहां लीजिंग एक्टिविटी 21% घटकर 21 लाख वर्ग फुट रह गई।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

हालांकि, 2026 की पहली छमाही में ग्रोथ शानदार रही है, लेकिन इस ट्रेंड के जारी रहने की संभावना कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। ई-कॉमर्स और रिटेल इंडस्ट्री से आने वाली सीजनल डिमांड के कारण इस सेक्टर में आमतौर पर दूसरी छमाही में ज्यादा एक्टिविटी देखी जाती है। हालांकि, निवेशकों को ग्लोबल जियोपॉलिटिकल इवेंट्स और ट्रेड में उतार-चढ़ाव जैसे संभावित जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए, जो भविष्य में इंडस्ट्रियल विस्तार की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, कुल डिमांड भले ही ज्यादा हो, लेकिन हैदराबाद जैसे खास क्षेत्रों में एब्जॉर्प्शन की रफ्तार या डेवलपर्स द्वारा नई सप्लाई को मैनेज करने की क्षमता अहम होगी। इन प्रमुख इंडस्ट्रियल हब में वैकंसी रेट्स (vacancy rates) और रेंटल ट्रेंड्स (rental trends) पर आने वाले अपडेट्स, इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स स्पेस में काम करने वाली कंपनियों के लिए लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी की तस्वीर साफ करने में मदद करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.