India Housing: Noida, Gurugram में प्रॉपर्टी की कीमतों में तूफानी तेजी, रेंटल यील्ड में भी सुधार

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Housing: Noida, Gurugram में प्रॉपर्टी की कीमतों में तूफानी तेजी, रेंटल यील्ड में भी सुधार

भारत का रियल एस्टेट मार्केट एक अनोखे दौर से गुजर रहा है, जहां घरों की कीमतें और किराया, दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं। नोएडा और गुरुग्राम कैपिटल प्राइस में सबसे आगे हैं, वहीं बेंगलुरु और हैदराबाद में रेंटल यील्ड में ज़बरदस्त उछाल देखा गया है।

क्या है रियल एस्टेट का नया ट्रेंड?

भारत का रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब प्रॉपर्टी की वैल्यू और किराये, दोनों में एक साथ तेजी देखी जा रही है। पहले जहां प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने पर किराये की आमदनी पीछे रह जाती थी, वहीं अब बड़े शहरों में यह ट्रेंड टूटा है और दोनों क्षेत्रों में मजबूत ग्रोथ दिख रही है।

प्राइस और यील्ड में कौन आगे?

यह ग्रोथ सभी जगहों पर एक जैसी नहीं है। मार्केट एनालिसिस के मुताबिक, नोएडा और गुरुग्राम कैपिटल एप्रिसिएशन के मामले में सबसे आगे हैं। इन इलाकों में घरों की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल आया है। नोएडा में 125% की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि गुरुग्राम 117% के साथ पीछे नहीं है।

जहां उत्तरी भारत की मार्केट्स एसेट प्राइस ग्रोथ में आगे हैं, वहीं दक्षिणी शहरों में रेंटल यील्ड के लिए हॉटस्पॉट बने हुए हैं। बेंगलुरु और हैदराबाद ने रेंटल यील्ड में सबसे खास सुधार दिखाया है, दोनों शहरों में 100 बेसिस पॉइंट का इजाफा हुआ है। इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी की कीमतें भले ही ज्यादा हों, लेकिन किरायेदारों की तरफ से बढ़ते किराए को सपोर्ट करने की पर्याप्त मांग है, जिससे प्रॉपर्टी मालिकों को पिछले सालों की तुलना में बेहतर रिटर्न मिल रहा है।

डिमांड के पीछे की वजहें और स्ट्रक्चरल बदलाव

इस ट्रेंड के पीछे कई कारण हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का विस्तार और शहरी केंद्रों में रहने वाले युवा, नौकरीपेशा प्रोफेशनल्स की बढ़ती संख्या हाउसिंग डिमांड को बढ़ा रही है। ये लोग अक्सर बेहतर सुविधाओं वाले हाई-एंड, गेटेड कम्युनिटीज को पसंद करते हैं।

हाल की नई सप्लाई में लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट का दबदबा रहा है, जो नई रेजिडेंशियल लॉन्च का आधे से ज्यादा हिस्सा है। हाई-क्वालिटी हाउसिंग की यह पसंद मांग वाले माइक्रो-मार्केट्स में कीमतों को ऊंचा बनाए हुए है, क्योंकि डेवलपर्स ऐसे प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रहे हैं जो आधुनिक घर खरीदारों और किरायेदारों की उम्मीदों पर खरे उतरें।

जोखिम और मार्केट पर नजर

सकारात्मक माहौल के बावजूद, मार्केट कुछ दबावों का सामना कर रहा है। एक मुख्य चिंता किरायेदारों के लिए बढ़ती जीवन यापन की लागत है, क्योंकि अब घरेलू आय का एक बड़ा हिस्सा किराए में जा रहा है। अगर किराए की लागत असहनीय हो जाती है, तो यह अंततः मांग को प्रभावित कर सकता है।

डेवलपर्स के नजरिए से, भले ही मांग मजबूत बनी हुई है, कंस्ट्रक्शन कॉस्ट इन्फ्लेशन एक लगातार चुनौती है। डेवलपर्स को घरों को किफायती बनाए रखने की जरूरत के साथ-साथ ऊंची बिल्डिंग लागतों को भी संतुलित करना होगा। इसके अलावा, अगर नए प्रोजेक्ट लॉन्च उन क्षेत्रों में वास्तविक ऑक्यूपेंसी या मांग से आगे निकलना जारी रखते हैं, तो विशिष्ट माइक्रो-मार्केट्स में ओवरसप्लाई का खतरा है। निवेशकों और संभावित घर खरीदारों को अपने विशिष्ट क्षेत्रों में सप्लाई-डिमांड बैलेंस और कंस्ट्रक्शन इन्फ्लेशन के प्रोजेक्ट प्राइसिंग पर पड़ने वाले प्रभाव पर करीब से नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.