देश के रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में नई लॉन्चिंग में **18%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डेवलपर्स अब **₹80 लाख से ₹1.5 करोड़** के मिड-प्रीमियम घरों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
बाजार का रुख और एक्टिविटी
अनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स (Anarock Property Consultants) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में रेजिडेंशियल मार्केट में नई सप्लाई में 18% की जबरदस्त तेजी आई है। इस दौड़ में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) और बेंगलुरु सबसे आगे रहे, जिन्होंने देश के सात प्रमुख शहरों की कुल सेल्स वॉल्यूम में 48% का योगदान दिया।
मिड-प्रीमियम सेगमेंट का दबदबा
रियल एस्टेट कंपनियां अब अपनी रणनीति बदल रही हैं। नई लॉन्चिंग का 34% हिस्सा ₹80 लाख से ₹1.5 करोड़ की कीमत वाले घरों का है। इससे साफ है कि डेवलपर्स मिडिल-क्लास खरीदारों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, जो बजट घरों के मुकाबले ब्याज दरों के प्रति कम संवेदनशील होते हैं। हैरानी की बात यह है कि हैदराबाद में नई सप्लाई में 120% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि MMR और बेंगलुरु में यह वृद्धि क्रमशः 27% और 17% रही।
निवेशकों के लिए चेतावनी
तेजी के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। स्टील और सीमेंट जैसी कंस्ट्रक्शन सामग्री की बढ़ती कीमतों से डेवलपर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। यदि मकानों की बिक्री की रफ्तार (Absorption Rate) नई सप्लाई के साथ कदमताल नहीं कर पाई, तो इन्वेंट्री बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। आने वाले त्योहारी सीजन के आंकड़े यह तय करेंगे कि क्या यह सप्लाई डिमांड के अनुरूप है या बाजार में ओवरसप्लाई का रिस्क बन रहा है।
