साल 2026 की पहली छमाही में भारत के बड़े शहरों में घरों की बिक्री ने पिछले एक दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कुल **1,71,471** यूनिट्स की बिक्री हुई। लेकिन, इस उछाल के बीच एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है – बाज़ार में ₹1 करोड़ से ऊपर के प्रीमियम घरों की मांग ज़बरदस्त बढ़ी है, जिससे आम और मध्यम वर्ग के खरीदारों के लिए विकल्प सीमित हो गए हैं।
प्रीमियम सेगमेंट में तेज़ी का कारण
भारतीय रियल एस्टेट मार्केट ने 2026 की पहली छमाही में 8 प्रमुख शहरों में 1,71,471 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की है। यह आंकड़ा खरीदारों की मज़बूत मांग को दर्शाता है। वहीं, बाज़ार में 1,87,350 नई यूनिट्स भी लॉन्च हुईं, जो बिक्री से थोड़ी ज़्यादा हैं।
लेकिन सबसे बड़ा बदलाव प्रीमियम सेगमेंट में देखने को मिला है। अब कुल रेजिडेंशियल ट्रांजैक्शन में 54% हिस्सेदारी ₹1 करोड़ से ज़्यादा कीमत वाले घरों की है, जो पिछले साल इसी अवधि में 49% थी। इसके पीछे पिछले कुछ सालों से प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार हुई बढ़ोतरी और डेवलपर्स का ज़्यादा मुनाफे वाले प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की ओर रणनीतिक झुकाव है। इस वजह से, एंट्री-लेवल और मिड-मार्केट के सस्ते घर कम उपलब्ध हो पा रहे हैं, जिससे आम खरीदारों को परेशानी हो रही है।
अलग-अलग शहरों का हाल
पूरे देश में बाज़ार का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। मुंबई अब भी बिक्री के मामले में सबसे बड़ा शहर बना हुआ है। वहीं, बेंगलुरु में टेक सेक्टर में हुई ज़बरदस्त हायरिंग की वजह से अच्छी ग्रोथ देखी गई। दूसरी ओर, नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में पिछले साल की तुलना में बिक्री में 7% की गिरावट आई है। डेटा बताता है कि NCR में सस्ते घरों की कमी है, क्योंकि वहां के प्राइम इलाकों में ज़्यादातर प्रॉपर्टी ₹2 करोड़ से ज़्यादा की कीमत पर बिक रही हैं। डेवलपर्स की पेशकश और खरीदारों की खरीदने की क्षमता के बीच का यह अंतर निवेशकों के लिए एक अहम पहलू है।
आगे का नज़ारा और जोखिम
रियल एस्टेट सेक्टर मज़बूत दिख रहा है, लेकिन 2026 की दूसरी छमाही में बाज़ार में स्थिरता आने की उम्मीद है। स्थिर रोज़गार और शहरीकरण जैसे कारक बाज़ार को प्रभावित करेंगे। हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी नज़र रखनी होगी, जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, स्थिर या ऊंची ऊर्जा की कीमतें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का रोज़गार पर असर, जो टेक हब में हाउसिंग डिमांड को प्रभावित कर सकता है।
अगर नई लॉन्चिंग की रफ़्तार बिक्री से ज़्यादा बनी रहती है, तो डेवलपर्स इन्वेंट्री को क्लियर करने के लिए पेमेंट स्ट्रक्चर में छूट या स्टाम्प ड्यूटी वेवर जैसे इंसेंटिव दे सकते हैं। निवेशकों के लिए सबसे ज़रूरी यह देखना होगा कि क्या डेवलपर्स बिना भारी डिस्काउंट के भी अपनी बिक्री की रफ़्तार बनाए रख पाते हैं।
