India Housing Sales: रियल एस्टेट में बूम! 3% बढ़ी बिक्री, लग्जरी सेगमेंट की धूम

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Housing Sales: रियल एस्टेट में बूम! 3% बढ़ी बिक्री, लग्जरी सेगमेंट की धूम

भारत के प्रमुख शहरों में H1 2026 के दौरान **1,38,382** घरों की बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में **3%** की बढ़ोतरी दिखाती है। लग्जरी सेगमेंट में जबरदस्त मांग देखी जा रही है, खासकर **₹1.5 करोड़ से ₹3 करोड़** के बीच के घरों की बिक्री में **58%** का उछाल आया है। बेंगलुरु में शानदार ग्रोथ देखने को मिली है, लेकिन नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग बिक्री से ज्यादा होने के कारण ओवरसप्लाई का खतरा भी बढ़ सकता है।

Detailed Coverage

रियल एस्टेट की शानदार परफॉर्मेंस

2026 की पहली छमाही में भारतीय आवासीय रियल एस्टेट मार्केट ने अच्छी परफॉर्मेंस दिखाई है। देश के टॉप सात शहरों में कुल 1,38,382 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 3% ज्यादा है। अप्रैल-जून तिमाही में बिक्री में 4% की गिरावट आई थी, जिसे एक्सपर्ट्स मौसमी उतार-चढ़ाव मान रहे हैं। डेवलपर्स का भरोसा भी बढ़ा है, उन्होंने H1 2026 में 1,68,507 नए यूनिट्स लॉन्च किए, जो पिछले साल से 9% ज्यादा है।

बेंगलुरु का जलवा और क्षेत्रीय रुझान

बेंगलुरु इस दौरान सबसे बड़ा मार्केट बनकर उभरा है, जहां 35,017 यूनिट्स बिके, जो 16% की बढ़ोतरी है। शहर में नए प्रोजेक्ट्स भी 41% बढ़कर 48,748 यूनिट्स हो गए। चेन्नई में बिक्री दर सबसे तेज 27% रही, जबकि दिल्ली NCR में 7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, मार्केट में असमानता भी है, क्योंकि हैदराबाद, मुंबई, कोलकाता और पुणे में बिक्री में मामूली गिरावट देखी गई। निवेशकों के लिए यह क्षेत्रीय अंतर समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रॉपर्टी की मांग स्थानीय रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर निर्भर करती है।

लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग की ओर झुकाव

घरों की बिक्री का पैटर्न बदल रहा है। खरीदार अब महंगे सेगमेंट की ओर बढ़ रहे हैं। ₹1.5 करोड़ से ₹3 करोड़ की प्राइस रेंज में बिक्री 58% बढ़ी है, और अब यह सेगमेंट 51,231 यूनिट्स का आंकड़ा छू चुका है। वहीं, ₹1 करोड़ से कम कीमत वाले घरों का मार्केट शेयर घट गया है। कुल मिलाकर, 2026 की पहली छमाही में ₹1 करोड़ से ऊपर की प्रॉपर्टीज की बिक्री 71% रही, जो पिछले साल 62% थी। यह शहरी महत्वाकांक्षाओं और बढ़ती आय को दर्शाता है, और यह भी कि डेवलपर्स बढ़ती लागतों के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए प्रीमियम प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं।

जोखिम और भविष्य के संकेत

नए प्रोजेक्ट्स में 9% की बढ़ोतरी आत्मविश्वास दिखाती है, लेकिन सावधानी भी बरतनी चाहिए। निवेशकों को यह देखना होगा कि बढ़ती सप्लाई के मुकाबले डिमांड बनी रहती है या नहीं, ताकि इन्वेंट्री बढ़ने और कीमतों पर दबाव आने से बचा जा सके। इसके अलावा, प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की वैल्यू पहले ही 6% से 15% तक बढ़ चुकी है। इतनी तेजी से बढ़ी कीमतें अफोर्डेबिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे आने वाली तिमाहियों में बिक्री धीमी हो सकती है। निवेशकों को ब्याज दरों के रुझान और रेगुलेटरी अपडेट्स पर भी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये होम लोन अफोर्डेबिलिटी और मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.