सप्लाई की कमी बनी बड़ी वजह
India के टॉप 9 शहरों में रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की बिक्री पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 13% घटकर 98,761 यूनिट्स पर आ गई। यह पिछले 18 तिमाहियों में सबसे कम बिक्री है। इस बड़ी गिरावट की जड़ें नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में आई 19% की भारी कमी में छिपी हैं। इस तिमाही में मार्केट में केवल 92,411 नए यूनिट्स ही उतरे, जिससे खरीदारों के लिए ऑप्शन्स बेहद सीमित हो गए और सीधे तौर पर कुल बिक्री पर असर पड़ा। यह पिछली तिमाही से भी 6% कम है।
बंटा हुआ मार्केट: कहीं तेजी, कहीं मंदी
मार्केट की तस्वीर अलग-अलग शहरों में काफी भिन्न है। Bengaluru ने जहां 3% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दिखाते हुए 17,991 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, वहीं Delhi-NCR में नए सप्लाई में 89% की जोरदार उछाल के कारण बिक्री 13% बढ़कर 12,141 यूनिट्स पर पहुंच गई। लेकिन, पश्चिमी शहरों का हाल काफी खराब रहा। Mumbai में बिक्री 20%, Pune में 25% और Thane में 24% तक गिर गई। इन शहरों में नए सप्लाई में भी भारी कमी देखी गई।
निवेशकों की चिंता और आगे की राह
मार्केट की इस सुस्ती का असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर का प्रमुख इंडेक्स, Nifty Realty, साल 2026 में अब तक करीब 24.40% लुढ़क चुका है। एनालिस्ट्स का मानना है कि सप्लाई की लगातार कमी डेवलपर्स को प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस करने के लिए मजबूर कर रही है, जिससे मिड और अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट की पहुंच और मुश्किल हो सकती है। Reserve Bank of India ने फरवरी 2026 में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है, जो स्थिरता तो देता है, लेकिन यह प्राइस-सेंसिटिव खरीदारों के लिए बहुत बड़ी राहत नहीं है। जिओ-पॉलिटिकल टेंशन और इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी भी अनिश्चितता बढ़ा रही है। अगले तीन सालों में प्रॉपर्टी की कीमतों में सालाना 6-7% की मामूली ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन यह ग्रोथ भी असमान रह सकती है।