India Housing Sales: Q2 में 6% गिरावट, डेवलपर्स के लिए बढ़ी इन्वेंटरी की चिंता

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Housing Sales: Q2 में 6% गिरावट, डेवलपर्स के लिए बढ़ी इन्वेंटरी की चिंता

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत के टॉप 8 शहरों में घराें की बिक्री 6% घटकर **91,729 यूनिट्स** पर आ गई है। मांग में नरमी के बावजूद, नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च 6% बढ़ गए हैं, जिससे इन्वेंटरी जमा होने और कीमतों पर दबाव का खतरा बढ़ गया है।

प्रॉपर्टी मार्केट पर आई मंदी

अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में नरमी देखी गई। देश के टॉप 8 महानगरों में घराें की बिक्री 6.1% गिरकर 91,729 यूनिट्स पर आ गई। यह गिरावट खरीदारों के सेंटिमेंट में बदलाव का संकेत देती है, क्योंकि ग्लोबल भू-राजनीतिक तनाव और टेक सेक्टर में AI से नौकरियों पर अनिश्चितता के चलते लोग सतर्क हो गए हैं।

इन्वेंटरी और कीमतों का दबाव

एक तरफ जहां मांग घटी, वहीं डेवलपर्स बाजार में नए सप्लाई लाते रहे। इस तिमाही में नए घरों की लॉन्चिंग 6% बढ़कर 89,161 यूनिट्स हो गई। इससे निवेशकों के लिए एक दिलचस्प स्थिति पैदा हो गई है: बिक्री कम होने के बावजूद बाजार में नए घर आ रहे हैं। अगर यह अंतर बना रहा, तो डेवलपर्स के पास इन्वेंटरी जमा हो सकती है, जिससे उन्हें नए प्रोजेक्ट्स धीमे करने या स्टॉक क्लियर करने के लिए इंसेंटिव देने पड़ सकते हैं।

इसके अलावा, प्रॉपर्टी की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। बिक्री के हिसाब से औसत कीमत लगातार दूसरी तिमाही में ₹10,000 प्रति वर्ग फुट से ऊपर रही, जो ₹10,153 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई। हालांकि, इससे यह पता चलता है कि बाजार में कीमतों में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है, लेकिन ऊंची कीमतों और आईटी जैसे सेक्टरों में नौकरी की अस्थिरता का मेल आने वाले महीनों में मिड-इनकम खरीदारों के लिए अफोर्डेबिलिटी पर दबाव डाल सकता है।

क्षेत्रीय प्रदर्शन में अंतर

पूरे देश में मार्केट का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। टेक-केंद्रित शहरों पर खरीदारों की झिझक का असर ज्यादा महसूस किया गया। पुणे में बिक्री में 21% की तेज गिरावट आई, इसके बाद अहमदाबाद में 20% की कमी आई। मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में भी 7% की कमी देखी गई, जबकि बेंगलुरु में बिक्री 9% गिरी। ये शहर अक्सर टेक्नोलॉजी सेक्टर में बदलावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, जहां नौकरियों की अनिश्चितता मुख्य कारक रही है।

इसके विपरीत, चेन्नई और हैदराबाद ने राष्ट्रीय रुझान के विपरीत प्रदर्शन किया। चेन्नई में बिक्री में 36% की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई, जबकि हैदराबाद में 15% का इजाफा हुआ। ऐसा लगता है कि इन क्षेत्रों ने व्यापक राष्ट्रीय मंदी के बावजूद अपनी गति बनाए रखी है, जिसका मुख्य कारण स्थानीय मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हो सकता है।

जोखिम और भविष्य का अनुमान

निवेशकों को लंबे समय तक चलने वाले भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के प्रभाव पर विचार करना चाहिए, जैसे कि अमेरिका-ईरान संघर्ष, जो समग्र आर्थिक सेंटिमेंट और ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, जिससे डेवलपर्स के लिए कंस्ट्रक्शन लागत बढ़ सकती है। आने वाले महीनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि आगामी त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ती है या नहीं, या फिर मौजूदा इन्वेंटरी जमा होने से डेवलपर्स को अपनी कीमतों या लॉन्च रणनीतियों को समायोजित करना पड़ता है। रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरधारकों को कर्ज के स्तर और कैश फ्लो पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि उच्च बिना बिकी इन्वेंटरी और कर्ज पर भारी निर्भरता वाली कंपनियों को वित्तीय लचीलेपन में कमी का सामना करना पड़ सकता है, यदि बिक्री में गिरावट जारी रहती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.